अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत में रहने वाले मोहम्मद सादिक इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उनके परिवार की संख्या किसी छोटे गांव के बराबर है, लेकिन उनकी गरीबी का आलम यह है कि घर के चूल्हे भी मुश्किल से जल पाते हैं। सादिक की चार पत्नियां हैं और उनके 58 बच्चे अभी जीवित हैं।
आजीविका का साधन मात्र 15 डॉलर सादिक एक स्थानीय कार डीलरशिप पर काम करते हैं। उनकी कमाई का जरिया बेहद सीमित है; उन्हें हर गाड़ी बेचने पर 1,000 अफगानी यानी करीब 15 डॉलर (लगभग 1200 रुपये) मिलते हैं। इतनी बड़ी आबादी का पेट पालने के लिए यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है। सादिक और उनका परिवार जिन मिट्टी के घरों में रहता है, वहां न तो ठीक से दरवाजे हैं और न ही खिड़कियां। अत्यधिक ठंड और गर्मी से बचने के लिए वे केवल पतले पर्दों का सहारा लेते हैं। घर में खाना पकाने के लिए लकड़ी खरीदने के पैसे भी नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में कागजों को जलाकर काम चलाना पड़ता है।
भूख और गरीबी का दंश स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार बच्चों को भूखे पेट ही सोना पड़ता है। सादिक के पास अपने बच्चों को जूते तक मुहैया कराने के पैसे नहीं हैं, जिस वजह से छोटे बच्चे नंगे पैर घूमने को मजबूर हैं। पिता ने स्वीकार किया कि वह बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
नाम भी याद नहीं रख पाते पिता बच्चों की संख्या इतनी अधिक है कि सादिक को अपने सभी बच्चों के नाम तक याद नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर वह किसी को बुलाने के लिए नाम लेने की जगह उन्हें बेटा या बच्चा कहकर ही संबोधित करते हैं। यह स्वीकारोक्ति उनके परिवार के अनियंत्रित विस्तार की कड़वी सच्चाई बयां करती है।
कम उम्र में शादी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सादिक ने बताया कि उनकी पत्नियों ने बहुत कम उम्र में शादी की थी। उन्होंने अपने कई बच्चों की मौत का कारण पत्नियों की अपरिपक्वता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को बताया। टीबी, खसरा और काली खांसी जैसी बीमारियों ने उनके कई बच्चों की जान ले ली, क्योंकि उनकी माताओं को बच्चों के पालन-पोषण और देखभाल का तजुर्बा नहीं था।
पछतावे में डूबा पिता इतने बड़े परिवार का बोझ उठाने के बाद, अब सादिक को अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है। उनका कहना है कि अगर उन्हें पहले से अंदाजा होता कि परिवार चलाने के लिए उन्हें इतनी भीषण गरीबी और संघर्ष का सामना करना पड़ेगा, तो वह कभी भी इतने बच्चों के पिता बनने का फैसला नहीं लेते। आज उनका जीवन सिर्फ एक पछतावा बनकर रह गया है।
من أغرب عجائب أفغانستان !
— اسـتاذ یـاســر (@UstadYasir70860) October 20, 2026
رجل من ولاية أروزجان لديه 58 ابنًا وابنة من أربع زوجات، ويقول إنه ينسى أحيانا أسماء بعض أبنائه لكثرتهم.
و لکن هو یعاني من الفقر الشديد. pic.twitter.com/N8EuVySfEX
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