नई दिल्ली। भारतीय जनसंघ की स्थापना के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संगठन की लंबी राजनीतिक और वैचारिक यात्रा को याद करते हुए इसे राष्ट्रसेवा, समर्पण और अंत्योदय के संकल्प की एक अनूठी कहानी बताया है।
राष्ट्रसेवा का बीज और वटवृक्ष बनता सफर 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी, आज वह एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह 75 वर्षों का सफर महज एक राजनीतिक विस्तार नहीं है, बल्कि करोड़ों कार्यकर्ताओं की मेहनत और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम का परिणाम है।
वैचारिक आधार: मुखर्जी से वाजपेयी तक की विरासत इस यात्रा की नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवाद ने रखी। आगे चलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद ने इसे एक स्पष्ट वैचारिक पहचान दी। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के सिद्धांतों ने संगठन को हर दौर में नई दिशा और ऊंचाई प्रदान की है।
आपातकाल का संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा मुख्यमंत्री ने आपातकाल (Emergency) के दौर को भारतीय राजनीति का एक कठिन लेकिन महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि उस चुनौतीपूर्ण समय में जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष किया। संगठन के लिए देश की एकता और अखंडता हमेशा राजनीतिक लाभ से ऊपर रही है। इसी संघर्ष ने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के उदय की मजबूत जमीन तैयार की थी।
अंत्योदय से विकसित भारत का संकल्प रेखा गुप्ता ने कहा कि जनसंघ का मूल मंत्र अंत्योदय यानी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान रहा है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनसंघ के शुरुआती विचारों और आज के विकास लक्ष्यों के बीच एक गहरी निरंतरता है।
एक राजनीतिक विरासत का विस्तार 1952 के पहले आम चुनाव में तीन लोकसभा सीटों से शुरुआत करने वाले जनसंघ ने भारतीय राजनीति में अपनी गहरी पैठ बनाई। 1980 में भारतीय जनता पार्टी के रूप में पुनर्गठन के बाद से यह कारवां निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि यह 75 वर्षों की यात्रा उन पीढ़ियों के त्याग और तपस्या की गाथा है, जिन्होंने विचारधारा को सर्वोपरि मानकर संगठन को सींचा है।
भारतीय जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष राष्ट्रसेवा, संगठन और अंत्योदय के प्रति समर्पण की गौरवशाली यात्रा के प्रतीक हैं।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) October 21, 2026
21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने भारतीय जनसंघ के रूप में राष्ट्रसेवा का जो बीज बोया था, वह आज विशाल वटवृक्ष बनकर करोड़ों कार्यकर्ताओं की शक्ति से… pic.twitter.com/DyiG6RD8oU
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