नक्सलवाद के साये से आजाद हुआ भारत: गृह मंत्री अमित शाह ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले बहादुर पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे को देश की एक बड़ी उपलब्धि करार दिया।

नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्ति

गृह मंत्री ने घोषणा की कि 31 मार्च 2026 को देश आधिकारिक रूप से नक्सलवाद के दशकों पुराने अभिशाप से मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि 1981 से नक्सलवाद ने कई जिलों में गहरे जख्म दिए थे, जिसमें अनगिनत निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों ने जान गंवाई। शाह ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा दिए गए बलिदान को याद करते हुए इसे देश की बड़ी सफलता बताया।

3,600 जवानों का बलिदान बना नींव

शाह ने बताया कि करीब पांच दशकों तक चली इस लड़ाई में 3,600 सुरक्षाकर्मियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने शहीदों के परिवारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश जिस विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है, उसकी नींव में इन्हीं बहादुरों का खून है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश इस ऋण को कभी नहीं भुला सकता।

पुलिस सेवा सबसे कठिन

पुलिसकर्मियों के कठिन जीवन पर चर्चा करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकारी सेवाओं में पुलिस की नौकरी सबसे चुनौतीपूर्ण है। आम नागरिक जब त्योहार मना रहे होते हैं, तब पुलिसकर्मी आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए मुस्तैद रहते हैं। उन्होंने कहा, अपने जीवन का स्वर्ण काल परिवार से दूर रहकर राष्ट्र सेवा में लगाना बहुत बड़ी बात है।

नशे के खिलाफ मोटरसाइकिल रैली

इस गरिमामयी कार्यक्रम में गृह मंत्री ने नशे के खिलाफ लड़ाई विषय पर आधारित एक मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विभिन्न राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय बलों के लगभग 90 पुलिसकर्मियों की यह रैली 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर में संपन्न होगी।

देश की प्रगति में प्रहरी का योगदान

अपने संबोधन में शाह ने यह भी कहा कि आजादी के बाद के लगभग आठ दशकों में भारत ने विश्व पटल पर जो सम्मान अर्जित किया है, उसके पीछे हमारे जवानों का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा में अगर इन जवानों ने अपना बलिदान न दिया होता, तो आज भारत की स्थिति बहुत भिन्न होती।

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