नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली मेट्रो और ट्रेनों को रोकने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
अदालत ने माना प्रथम दृष्टया मामला जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ताओं ने प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला साबित कर दिया है। कोर्ट ने गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC प्रमुख डी. तारा से इस पर जवाब मांगा है।
13 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश अदालत ने संबंधित अधिकारियों को 13 अक्टूबर 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि उन्होंने कोर्ट के पुराने आदेश का पालन क्यों नहीं किया और वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट क्या है। फिलहाल, अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने से छूट दी गई है।
याचिकाकर्ता का गंभीर आरोप वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपनी अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि प्रशासन ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है। याचिका में कहा गया है कि आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हुए मेट्रो स्टेशनों को बंद करना और ट्रेनों को रद्द करना एक सोची-समझी कार्रवाई थी।
क्या है पूरा मामला? यह विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कुछ छात्र संगठनों द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है। विरोध प्रदर्शन को रोकने के नाम पर दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया था और ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली सख्ती शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि प्रदर्शनों के नाम पर आम जनता को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मेट्रो और ट्रेनों को पूरी तरह ठप कर दिया जाए। कोर्ट ने बैरिकेड्स हटाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बेवजह हिरासत में न लेने के भी आदेश दिए थे।
STORY | Delhi protests: SC says petitioners seeking contempt action against authorities have made out prima-facie case
— Press Trust of India (@PTI_News) October 11, 2026
The Supreme Court on Sunday said contempt petitioners, who have alleged violations of the court s direction to ensure no complete prohibition on metro and… pic.twitter.com/N3UxA6ioDK
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