नेपाल में एक बार फिर कुदरत का कहर बरपा है। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 की सुबह गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी का पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, पहाड़ के बड़े पत्थर और मलबे को लेकर निचले इलाकों में घुस गया। इस आपदा ने नेपाल को 45 दिन पहले हुए विनाश की याद दिला दी है।
आमतौर पर बाढ़ का मतलब भारी बारिश होता है, लेकिन इस बार मामला अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि गोरखा के चुमनुब्री इलाके में हुए भूस्खलन से बूढ़ी गंडकी की एक सहायक धारा का रास्ता बंद हो गया था। पहाड़ का मलबा नदी में गिरने से वहां एक अस्थायी झील बन गई थी। जब पानी का दबाव अधिक हो गया, तो यह मलबा (प्राकृतिक बांध) टूट गया और जमा हुआ पानी सैलाब बनकर नीचे की ओर आ गया।
पहाड़ी इलाकों में बाढ़ आने की प्रक्रिया को समझना जरूरी है:
इस अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है:
इस आपदा में कई लोगों की जान स्थानीय लोगों की सतर्कता से बची। नदी के असामान्य शोर, पानी के बहाव का अचानक रुकना या अचानक वेग बढ़ना खतरे का संकेत होता है। घटना के बाद प्रशासन ने गोरखा, धादिंग, चितवन और नवलपरासी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि खतरा पूरी तरह टला नहीं है। यदि भूस्खलन का मलबा दोबारा नदी का रास्ता रोकता है, तो पानी की दूसरी लहर भी आ सकती है। अधिकारियों ने नदी के किनारे जाने, पुराने पुलों पर रुकने या नदी पार करने से सख्ती से बचने की सलाह दी है। नेपाल के पहाड़ी भूगोल को देखते हुए, अब केवल बारिश नहीं, बल्कि पहाड़ों के दरकने और नदियों के बहाव पर निरंतर निगरानी की जरूरत है।
🇳🇵 Flash floods hit central Nepal on Sunday, sweeping away houses and leaving at least five people missing, officials said, weeks after devastating flooding that killed hundreds.
— AFP News Agency (@AFP) October 11, 2026
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