बिहार पुलिस की कमान अब महिला हाथों में? डीजीपी की रेस में सबसे आगे प्रीता वर्मा
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बिहार में स्थायी डीजीपी (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रही अटकलों के बीच 1991 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा का नाम सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर उन्हें मिले हालिया एक्सटेंशन ने उनकी दावेदारी की संभावनाओं को और प्रबल कर दिया है।

इस्तीफे के बाद की स्थिति 1991 बैच के आईपीएस विनय कुमार के अचानक इस्तीफे के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय में शीर्ष पद खाली हो गया था। उनके कार्यकाल पूरा होने में अभी समय शेष था, लेकिन उनके पद छोड़ने के बाद से ही राज्य में नए डीजीपी की तलाश तेज हो गई। अब सरकार इस महत्वपूर्ण पद के लिए एक ऐसे नाम की तलाश में है जो प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर फिट बैठता हो।

कौन-कौन है इस दौड़ में? प्रीता वर्मा के अलावा कई अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी इस पद के लिए चर्चा में हैं। इनमें 1992 बैच के बी. श्रीनिवासन, 1993 बैच के जितेंद्र कुमार और जेएस गंगवार के साथ-साथ कुंदन कृष्णन, डॉ. परेश सक्सेना और निर्मल कुमार आजाद जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी अधिकारी लंबे समय से बिहार पुलिस की सेवा में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का गणित विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीता वर्मा की दावेदारी के पीछे केवल उनकी वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहे हैं। प्रीता वर्मा राजस्थान मूल की हैं। जानकारों के अनुसार, उनके समुदाय की अच्छी खासी आबादी राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में है। हालांकि सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार बड़ा फैसला ले सकती है।

बिहार की पहली महिला डीजीपी बनने के करीब यदि प्रीता वर्मा को स्थायी डीजीपी नियुक्त किया जाता है, तो यह बिहार पुलिस के इतिहास में एक मील का पत्थर होगा। वह राज्य की पहली महिला स्थायी डीजीपी बनेंगी। अपनी विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित प्रीता वर्मा का कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है, तो उन्हें राज्य पुलिस को नई दिशा देने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

पारदर्शी छवि और संपत्ति का ब्यौरा प्रीता वर्मा अपनी कार्यशैली के अलावा अपनी सादगी के लिए भी जानी जाती हैं। संपत्ति के नवीनतम ब्यौरे के अनुसार, उनके पास कोई अचल संपत्ति (मकान या जमीन) नहीं है। उनकी जमा-पूंजी मुख्य रूप से बैंक खातों, पीपीएफ, गोल्ड और एलआईसी पॉलिसियों में निवेशित है। उनकी यह पारदर्शी छवि भी उनके पक्ष में जा सकती है।

अब सबकी निगाहें गृह विभाग की अगली अधिसूचना पर टिकी हैं कि क्या प्रीता वर्मा का कार्यवाहक टैग हटकर उन्हें राज्य का स्थायी पुलिस मुखिया बनाया जाएगा।

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