नीमच में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सहकारी ऋण व्यवस्था को न केवल सरल बना रही है, बल्कि इसे पूरी तरह किसान हितैषी स्वरूप देने पर काम किया जा रहा है।
खेती के साथ अपनाएं अन्य विकल्प मुख्यमंत्री ने अन्नदाताओं से केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्यपालन को जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गांधीसागर जलाशय के आसपास मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
औषधीय खेती का गढ़ बना नीमच नीमच जिले की तारीफ करते हुए सीएम ने कहा कि यहां के किसानों ने औषधीय फसलों के उत्पादन में देश भर में अपनी धाक जमाई है। अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी और आंवला जैसी फसलों ने जिले को कृषि व्यापार का प्रमुख केंद्र बना दिया है। जिले में धनिया आधारित 79 प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होना इसकी बड़ी उपलब्धि है।
मंडी की आय में बड़ा उछाल नीमच कृषि उपज मंडी की प्रगति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मंडी की आवक 53.46 लाख क्विंटल से बढ़कर 72 लाख क्विंटल के पार पहुंच गई है। वहीं, मंडी की आय बढ़कर 34.5 करोड़ रुपये हो गई है, जो क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का प्रमाण है।
सिंचाई परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर जिले में रामपुरा-मनासा, जावद-नीमच और खुमान सिंह शिवाजी जैसी सिंचाई परियोजनाओं के जरिए एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कृषि रकबा तेजी से बढ़ेगा।
पर्यटन और प्राकृतिक खेती पर जोर सीएम ने बताया कि जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है, जो मिट्टी की उर्वरता के लिए वरदान है। इसके अलावा, गांधीसागर अभयारण्य में चीता परियोजना के आने से स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, जिससे नीमच को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों और मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
*‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के अंतर्गत आज नीमच में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में वर्चुअली जुड़कर अन्नदाताओं से संवाद किया।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) October 5, 2026
नीमच के हमारे किसान परंपरागत फसलों के साथ औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। नीमच में धनिया आधारित 79 प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हैं।… pic.twitter.com/JPzX3KqAGk
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