रानी दुर्गावती के बहाने 2027 का सियासी चक्रव्यूह: बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक बिछी बिसात
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वीरता, बलिदान और सांस्कृतिक गौरव की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विमर्श छिड़ गया है। भाजपा ने रानी दुर्गावती की विरासत को गौरव से जोड़कर 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 30 सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है।

योगी और शाह का अलग-अलग संदेश क्यों? प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के बड़े नेताओं ने रानी दुर्गावती को नमन किया, लेकिन उनके बयानों में बारीक अंतर राजनीतिक संदेशों को स्पष्ट करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें चंदेल वंश की वंशज बताया, तो गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें गोंडवाना साम्राज्य की महारानी के रूप में याद किया। यह केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है।

बुंदेलखंड में राजपूत गौरव का दांव रानी दुर्गावती का जन्म महोबा के चंदेल राजपूत परिवार में हुआ था। योगी आदित्यनाथ का उनके क्षत्रिय मूल को रेखांकित करना सीधे तौर पर बुंदेलखंड की 19 विधानसभा सीटों पर राजपूत और सवर्ण मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश है। विपक्ष के जातिगत समीकरणों के बीच भाजपा यहाँ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के जरिए अपनी पकड़ को मजबूत रखना चाहती है।

पूर्वांचल में आदिवासी कार्ड का जादू दूसरी ओर, अमित शाह का गोंडवाना की महारानी पर जोर देना पूर्वांचल और मध्य यूपी के आदिवासी वोट बैंक को साधने की कवायद है। गोंड, खरवार और ओझा जैसी अनुसूचित जनजातियां सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली और वाराणसी जैसे जिलों में निर्णायक स्थिति में हैं। ओबरा और दुद्धी जैसी आरक्षित सीटों समेत करीब 11 सीटों पर यह गोंडवाना कार्ड भाजपा की चुनावी नैया पार कराने में सक्षम है।

30 सीटों का महा-समीकरण रानी दुर्गावती का जीवन राजपूत और आदिवासी विरासत का अनूठा संगम है। भाजपा इसी कड़ी का उपयोग करके एक ऐसा सामाजिक गठबंधन बनाने में जुटी है, जो बुंदेलखंड के राजपूतों और पूर्वांचल के आदिवासियों को एक मंच पर ला सके। यह सपा-कांग्रेस के PDA फॉर्मूले की काट के रूप में देखा जा रहा है।

नारी शक्ति और शासन का मॉडल रानी दुर्गावती की जयंती के बहाने भाजपा महिला नेतृत्व को भी प्राथमिकता दे रही है। उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों (तालाबों और मंदिरों का निर्माण) का जिक्र करके पार्टी महिलाओं और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है। आने वाले समय में रानी दुर्गावती का यह ऐतिहासिक गौरव भाजपा के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे, लेकिन इतना तय है कि भाजपा ने अपनी चुनावी जमीन तैयार कर ली है।

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