लखनऊ में समाजवादी पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर दिल्ली की मशहूर इंग्लिश टीचर नीतू मैम (नीतू सिंह) की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अखिलेश यादव के सामने दिए गए उनके तीखे भाषण ने यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या वह जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाली हैं।
अखिलेश के सामने तीखे तीर 3 अक्टूबर को लखनऊ में शिक्षक-अभ्यर्थी संवाद के दौरान नीतू सिंह ने मौजूदा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश यादव के कार्यकाल की लैपटॉप योजना की तारीफ की, तो वहीं वर्तमान व्यवस्था को पर्ची वाला बाबा और पाखंड-चमत्कार जैसे शब्दों से घेरा। उन्होंने शिक्षक भर्ती की धीमी प्रक्रिया और परीक्षा कैलेंडर की खामियों पर खुलकर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर चर्चा, क्या चुनाव लड़ेंगी नीतू मैम? नीतू सिंह के इस आक्रामक तेवर के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से वायरल हो रहा है कि क्या वह आगामी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर मैदान में उतरेंगी? हालांकि, अभी तक न तो नीतू सिंह की तरफ से और न ही सपा की ओर से उनके औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने की कोई घोषणा की गई है।
छात्रों की आवाज बनने का रहा है पुराना नाता नीतू मैम केवल एक टीचर नहीं, बल्कि छात्रों के बीच एक प्रभावशाली नाम हैं। अगस्त 2025 में SSC परीक्षा विवाद के दौरान दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। छात्रों का समर्थन करते हुए पुलिस हिरासत तक पहुंचने की उनकी तस्वीरें और वीडियो पहले ही उनकी मजबूत छवि बना चुके हैं।
क्या है उनकी पृष्ठभूमि? झारखंड के गिरिडीह से आने वाली नीतू सिंह ने संघर्षों के बाद दिल्ली में KD Campus के जरिए शिक्षा जगत में अपनी पहचान बनाई। आज लाखों प्रतियोगी छात्र उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और किताबों के जरिए उनसे जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि किसी भी राजनीतिक मंच पर उनका बोलना केवल एक भाषण नहीं, बल्कि युवाओं के एक बड़े वर्ग का संदेश माना जा रहा है।
सपा की रणनीति और युवाओं का साथ अखिलेश यादव फिलहाल युवाओं को जोड़ने के लिए शिक्षा और बेरोजगारी को अपना मुख्य मुद्दा बना रहे हैं। बुलंदशहर के शिक्षक नवीन शर्मा के बाद नीतू मैम की सपा मंच पर मौजूदगी यह दर्शाती है कि पार्टी अब पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग के प्रभावशाली लोगों के जरिए अपनी पैठ बनाना चाहती है।
फिलहाल, नीतू मैम का अगला कदम क्या होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा? लेकिन इतना तय है कि उनकी सक्रियता ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
*Parchi-wale baba desh ke PM or CM nahi hain, Jeise apke pass rights hain weise hi unke pass hain.
— Tsunami singh (@Native_champion) October 4, 2026
Comparison karna hi hain to Akhilesh vs Yogi ji ka karo na aunty. Frustration me kuchh bhi bak rahi ho.@NeetuSingh202 pic.twitter.com/PgAmj9zU9V
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