सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से सस्पेंड करने की मांग को फिलहाल ठुकरा दिया है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया और लिए गए 14 अहम फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने CEC को हटाने से इनकार कर दिया, लेकिन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला? याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने SIR (स्टैच्यूटरी इंक्वायरी एंड रिपोर्ट) और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे 14 फैसले बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि आयोग के भीतर पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। इसी आधार पर ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने या उनके काम करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ बड़ा आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा, पहले चुनाव आयोग को अपना पक्ष रखने दीजिए। अगर रिकॉर्ड से कानून का उल्लंघन साबित हुआ, तो हम उन फैसलों को रद्द करने या उन पर रोक लगाने से पीछे नहीं हटेंगे।
बहस का केंद्र: क्या फैसले एकतरफा थे? याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जहां सहमति न हो, वहां बहुमत का रास्ता अपनाना चाहिए, जो कथित तौर पर नहीं हुआ। कोर्ट अब चुनाव आयोग से उन रिकॉर्ड्स की मांग करेगा ताकि यह पता चल सके कि क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
2023 का कानून बनाम संवैधानिक शक्ति सुनवाई के दौरान 2023 के नए चुनाव कानून पर भी तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह कानून CEC को अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत कोर्ट सीधे CEC को सस्पेंड नहीं कर सकता, लेकिन उनके द्वारा लिए गए फैसलों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) करना कोर्ट का अधिकार है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल इस विवाद का असर संसद में भी दिख सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर से महाभियोग प्रस्ताव लाने की रणनीति बना रहा है। अप्रैल 2026 में ऐसा ही प्रयास लोकसभा में खारिज हो चुका है, लेकिन अब विपक्षी दल इसे फिर से उठाने की तैयारी में हैं।
आगे क्या होगा? पूरा मामला अब चुनाव आयोग द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिका है। यदि आयोग ने साबित कर दिया कि फैसले तय नियमों के तहत बहुमत से हुए थे, तो याचिकाकर्ताओं का दावा कमजोर पड़ जाएगा। लेकिन, यदि कोर्ट को नियमों के उल्लंघन का ठोस सबूत मिला, तो चुनाव आयोग के 14 बड़े फैसलों का भविष्य अधर में पड़ सकता है।
The Supreme Court refuses to pass any interim order to suspend the Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar over allegations that he took decisions unilaterally in the Election Commission of India, without consensus from the two other Election Commissioners.
— ANI (@ANI) October 5, 2026
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