विश्व आवास दिवस: 40 साल का सफर और एक आदर्श शहर का खाका
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हर साल अक्टूबर के पहले सोमवार को मनाया जाने वाला विश्व आवास दिवस इस बार एक विशेष पड़ाव पर है। 1986 में शुरू हुए इस सफर के 40 साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर मस्कट, ओमान में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जो शहरी जीवन की चुनौतियों पर मंथन का एक वैश्विक मंच बना है।

क्या हैं एक आदर्श शहर के 6 स्तंभ?

संयुक्त राष्ट्र (ESCAP) ने स्पष्ट किया है कि कोई शहर तभी सफल माना जाता है, जब वह सभी के लिए काम करे। इसके लिए संस्था ने आदर्श शहर के 6 मुख्य बिंदु तय किए हैं:

1. 15-मिनट का कॉन्सेप्ट: शहर में काम, बाजार, स्कूल और पार्क पैदल या साइकिल की दूरी पर होने चाहिए। इससे समय की बचत के साथ प्रदूषण और ट्रैफिक में भी कमी आती है।

2. प्रकृति के साथ तालमेल: शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में पार्क और पेड़ केवल सजावट नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने का सुरक्षा कवच हैं। ये भीषण गर्मी और बाढ़ जैसी आपदाओं से शहर को बचाते हैं।

3. सुरक्षित और किफायती आवास: हर नागरिक को बुनियादी सुविधाओं (पानी, बिजली) से लैस सुरक्षित घर मिलना चाहिए। संगठन कमजोर वर्गों के लिए किफायती घरों की उपलब्धता पर विशेष जोर देता है।

4. तकनीक का सही इस्तेमाल: स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग बाढ़ की चेतावनी देने, डिजिटल जनसेवाओं को सुगम बनाने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए किया जाना चाहिए।

5. सुगम आवाजाही: फुटपाथ और सार्वजनिक परिवहन का ढांचा ऐसा हो जो बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए पूरी तरह सुलभ हो।

6. जन-भागीदारी: शहर की प्लानिंग और निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी अनिवार्य है। जब समुदाय खुद फैसला लेगा, तभी शहर सभी के लिए बेहतर बन पाएगा।

वैश्विक और स्थानीय स्तर पर संकल्प

संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ भारत में भी इस दिन का महत्व रेखांकित किया गया है। मणिपुर सरकार ने इस मौके पर सुरक्षित, समावेशी और टिकाऊ समुदायों के निर्माण की अपनी साझा जिम्मेदारी दोहराई है।

कुल मिलाकर, विश्व आवास दिवस का यह 40वां साल हमें यह याद दिलाता है कि केवल बड़ी इमारतें बनाना काफी नहीं है, बल्कि एक ऐसा वातावरण तैयार करना जरूरी है जहाँ हर नागरिक सम्मान और स्वास्थ्य के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके।

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