फॉर्म-7 पर संग्राम: ओवैसी का आरोप- मुस्लिम वोटर्स के नाम काटने की रची जा रही साजिश
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वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर देश में विवाद गहरा गया है। फॉर्म-6 के बाद अब फॉर्म-7 को लेकर छिड़े संग्राम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ओवैसी का बड़ा दावा AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी और RSS के कार्यकर्ता फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस फॉर्म के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। ओवैसी ने चेतावनी दी है कि यदि यह ड्रामा बंद नहीं हुआ, तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों से भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

कौन काट रहा है नाम? हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि निर्वाचन आयोग और तेलंगाना के CEO को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-7 जमा करने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जा रही है। उन्होंने मांग की कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को हर फॉर्म-7 की गहन जांच करनी चाहिए ताकि पता चल सके कि इसके पीछे किसका हाथ है।

बीजेपी का पलटवार ओवैसी के इन आरोपों पर तेलंगाना बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता एनवी सुभाष ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ओवैसी केवल सार्वजनिक बयानबाजी कर रहे हैं। सुभाष ने चुनौती दी कि यदि एआईएमआईएम प्रमुख के पास गड़बड़ी के ठोस सबूत हैं, तो वे सड़क पर शोर मचाने के बजाय संबंधित न्यायिक मंच या सक्षम अधिकारियों के सामने इन्हें पेश करें और कानूनी कार्रवाई की मांग करें।

चुनाव आयोग पर चौतरफा दबाव फॉर्म-7 को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग पहले ही विपक्ष के निशाने पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का अभियान आयोग को बैकफुट पर ले आया है। इससे पहले फॉर्म-6 में भी आपत्तियों के बाद आयोग को कुछ प्रावधान बदलने पड़े थे।

क्या है फॉर्म-7? फॉर्म-7 का उपयोग मौजूदा मतदाता सूची में शामिल किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने के आवेदन के लिए किया जाता है। फिलहाल, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इसके दुरुपयोग की शिकायतों ने चुनाव आयोग की साख पर संकट खड़ा कर दिया है, जिसे लेकर अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं।

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