CJI अब जो चाहें करें, कोई फर्क नहीं पड़ता : सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर भड़के सौरभ दास
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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR (सिस्टम इंटीग्रेटेड रिपोर्ट) से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण सुनवाई चल रही है। इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास ने न्यायपालिका की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यायपालिका पर अविश्वास का आरोप सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल और बिहार में SIR प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देकर न्यायपालिका ने युवाओं के मतदान अधिकारों के साथ समझौता किया है। दास ने कहा, अब सुप्रीम कोर्ट जो चाहे करे, किसी को फर्क नहीं पड़ता। लोगों का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा।

युवाओं के भविष्य और संवैधानिक संकट पर सवाल CJP नेता ने केवल चुनाव प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल और दिल्ली के कथित संवैधानिक संकट का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि इन मामलों में समय पर न्यायिक हस्तक्षेप न होने के कारण न्यायपालिका की साख पर बट्टा लगा है। दास का दावा है कि आने वाले समय में देश के युवा (Gen Z) इन फैसलों का कड़ा आकलन करेंगे।

क्या है सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का मामला? सोमवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। विवाद मुख्य रूप से इस बात पर है कि क्या CEC अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले ले सकते हैं।

चुनाव आयोग के 14 फैसलों पर विवाद याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 फैसलों पर असहमति जताई थी। आरोप है कि ये फैसले बिना उचित विचार-विमर्श के लिए गए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे संस्थागत चर्चा का एक सामान्य हिस्सा बताया है।

अदालत के पाले में गेंद अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने इन एकतरफा फैसलों को रद्द करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अदालत CEC की शक्तियों को सीमित करेगी या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कोई बड़ा निर्देश देगी।

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