अमेठी में हार के बाद डर गए थे राहुल, रायबरेली लड़ने के लिए अखिलेश को करना पड़ा था मजबूर
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उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इंडिया गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर घमासान तेज हो गया है। प्रतापगढ़ से सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल (एसपी सिंह पटेल) ने कांग्रेस को लेकर तीखे तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस को 50 से ज्यादा सीटें देना, चुनाव से पहले ही उन सीटों को हारने जैसा है।

कांग्रेस का स्ट्राइक रेट और जनाधार पर सवाल सांसद शिवपाल सिंह पटेल के अनुसार, 2022 और 2024 के परिणामों को देखते हुए कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। उन्होंने कहा कि उनके स्ट्राइक रेट के हिसाब से कांग्रेस को 30-35 से ज्यादा सीटें नहीं मिलनी चाहिए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की दरियादिली के कारण ही उन्हें 50 सीटों तक सीमित रखने की बात हो रही है, क्योंकि जमीनी स्तर पर कांग्रेस के पास न तो मजबूत उम्मीदवार है और न ही कोई जनाधार।

राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला शिवपाल सिंह पटेल ने राहुल गांधी को लेकर एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि अमेठी में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी का मनोबल टूट गया था। वे 2024 में रायबरेली से भी चुनाव लड़ने के मूड में नहीं थे। सांसद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पूरी तरह से सपा पर आश्रित हैं।

उन्होंने बताया, राहुल दक्षिण भारत से चुनाव लड़ने का मन बना चुके थे। अखिलेश यादव ने उन्हें समझाया कि रायबरेली उनकी परंपरागत सीट है, वहां से लड़ना जरूरी है। जब अखिलेश ने दो-टूक कह दिया कि यदि आप नहीं लड़ेंगे तो हम अपना उम्मीदवार उतार देंगे, तब जाकर राहुल गांधी राजी हुए।

सपा ने की थी जीत सुनिश्चित सांसद ने दावा किया कि राहुल गांधी की रायबरेली से जीत के पीछे समाजवादी पार्टी की पूरी ताकत थी। सपा कार्यकर्ताओं ने अपने वोटरों से पूरी ताकत के साथ राहुल को जिताने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद भी यह मानती है कि यूपी में उनका अपना कोई आधार नहीं है, फिर भी कुछ नेता 150 सीटों की मांग कर रहे हैं, जो गठबंधन धर्म के खिलाफ है।

सीट शेयरिंग पर रार जारी हाल ही में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम ने 150 से अधिक सीटों की मांग की थी, जिसका कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी समर्थन किया। जवाब में सपा ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कांग्रेस को यह तय करना होगा कि उसे सपा के साथ लड़ना है या भाजपा के लिए रास्ता साफ करना है।

अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर संकेत दिए हैं कि गठबंधन का मुख्य उद्देश्य सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि जीत सुनिश्चित करना है। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस और सपा के बीच उपजी यह तकरार इंडिया गठबंधन में कोई बड़ा भूचाल लाएगी या आपसी सुलह का रास्ता निकलेगा।

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