फ्रांस इन दिनों एक भीषण संकट की चपेट में है। हाईस्कूल के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं, स्कूलों में ताले जड़ दिए गए हैं और जगह-जगह आगजनी व झड़पों की खबरें हैं। सोमवार से अब तक 5,000 से ज्यादा छात्रों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो इस आंदोलन की गंभीरता को बयां करता है।
यह आंदोलन महज सुविधाओं की मांग नहीं है। छात्रों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही पुरानी स्कूल व्यवस्था अब ढह रही है। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके चलते कई जरूरी विषयों की क्लास नहीं हो पा रही हैं।
इसके अलावा, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं (30-35 छात्र), जर्जर इमारतें और 8 से 10 घंटे का तनावपूर्ण शेड्यूल छात्रों के सब्र का बांध तोड़ चुका है। गरीब इलाकों (जैसे सीन-सेंट-डेनिस) में सुविधाएं नदारद हैं, जिससे छात्रों में गहरे असंतोष की भावना है।
इस आंदोलन की चिंगारी 17 सितंबर को पेरिस के पास क्रेतै (Créteil) के एक स्कूल से शुरू हुई थी। वहां की मांगें मान ली गईं, लेकिन तब तक यह सोशल मीडिया की मदद से पूरे देश में फैल चुका था। टिकटॉक, स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर पुलिस से झड़प और आगजनी के वीडियो वायरल होने से यह आंदोलन एक वायरल क्रांति बन गया है।
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है। सरकार ने वामपंथी दलों पर इसे हवा देने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष सरकार की नीति को जिम्मेदार ठहरा रहा है। हालात इतने बेकाबू हैं कि अब तक 600 से ज्यादा पुलिसकर्मी और कई शिक्षक घायल हो चुके हैं। एक छात्र की आंख में गंभीर चोट लगने के बाद पुलिस की बर्बरता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि सरकारी आंकड़े (शिक्षा बजट में मामूली बढ़ोतरी) केवल आंखों में धूल झोंकने के लिए हैं। महंगाई के मुकाबले यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। मंत्रालय का कहना है कि छात्रों की संख्या कम हो रही है इसलिए बजट कम है, जबकि छात्र इसे शिक्षा प्रणाली में भेदभाव का नाम दे रहे हैं।
छात्र संगठनों ने 6 अक्टूबर को देशभर में बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर सतर्क हैं कि कहीं यह प्रदर्शन अराजक तत्वों के हाथ में न चला जाए। पेरिस पुलिस चीफ ने सभी से शांति की अपील की है, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े हैं।
यह आंदोलन अब सिर्फ स्कूलों का मुद्दा नहीं रह गया है। यह फ्रांस की उस शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है, जो समानता और अच्छे भविष्य का वादा तो करती है, लेकिन हकीकत में छात्रों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रही है। अब देखना यह है कि क्या सरकार लाठी-गोली के अलावा कोई ठोस हल निकाल पाएगी।
🚨 Breaking - France 🇫🇷
— Mel Gerard Gibson🇺🇲 (@MelGerardGop7) October 3, 2026
Paris Stock Exchange taken over by Protesters.
The French are not stopping - this is the beginning of a worldwide revolution.
pic.twitter.com/z8p2XvdlD7
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