गोरखपुर सपा में कुर्सी का संग्राम: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, मंत्री संजय निषाद की एंट्री से बढ़ा सियासी पारा
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गोरखपुर प्रेस क्लब में शनिवार को समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय अखाड़े में बदल गई, जब टिकट के दावेदार और पूर्व जिलाध्यक्ष के समर्थकों के बीच कुर्सी को लेकर हिंसक झड़प हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब यह मामला तूल पकड़ चुका है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा समाजवादी पार्टी लोकतंत्र बचाओ सप्ताह के तहत प्रेस को जानकारी दे रही थी। इस दौरान ग्रामीण विधानसभा सीट के टिकट दावेदार अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। बैठने की जगह को लेकर अंशुमान के बेटे कमलेश सिंह और पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के बीच विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गया। आरोप है कि इस दौरान कमलेश सिंह ने नगीना साहनी को थप्पड़ मार दिया।

दावेदारों का अपना-अपना तर्क अंशुमान सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि वह केवल नगीना साहनी से थोड़ा किनारे होने का आग्रह कर रहे थे, जिसे राजनीतिक रंग दिया गया। उन्होंने दावा किया कि नगीना साहनी उनकी छवि खराब करना चाहते हैं क्योंकि दोनों एक ही सीट से टिकट के दावेदार हैं। दूसरी ओर, नगीना साहनी ने आरोप लगाया कि अंशुमान के लोग जबरन कुर्सी खाली कराने आए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके साथ गाली-गलौज की गई और उन्हें जान से मारने की धमकी मिली।

सपा ने की कार्रवाई विवाद के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए अंशुमान सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि, मामला यहीं शांत नहीं हुआ।

संजय निषाद ने अखिलेश यादव को दी चेतावनी योगी सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद ने इस मुद्दे को निषाद समाज के सम्मान से जोड़ दिया है। उन्होंने नगीना साहनी का समर्थन करते हुए अखिलेश यादव को सीधे चुनौती दी है। संजय निषाद ने कहा, क्या कुर्सी पर बैठने का अधिकार केवल सामंतवादियों का है? नगीना साहनी ने तब सपा का झंडा उठाया था जब पार्टी को कोई पूछने वाला नहीं था।

अल्टीमेटम और राजनीति मंत्री संजय निषाद ने अखिलेश यादव को कल तक का समय दिया है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी नेता पर मुकदमा दर्ज हो, वरना वे परसों समाजवादी पार्टी कार्यालय का घेराव करेंगे। साथ ही, उन्होंने निषाद समाज से अपील की कि वे इस घटना से सीख लें कि किस तरह उन्हें अपमानित किया जा रहा है।

यह विवाद अब सपा की आंतरिक कलह के साथ-साथ एक बड़े जातीय समीकरण के मुद्दे में बदलता दिख रहा है। फिलहाल, घटना के बाद स्थानीय राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है।

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