ट्रंप की दक्षिण कोरिया को दो टूक: अलास्का गैस प्रोजेक्ट पर जल्द साइन करो वरना दोगुनी होगी कीमत
News Image

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया को सख्त चेतावनी जारी की है। यह मामला अलास्का में बन रहे अरबों डॉलर के गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से जुड़ा है। सियोल की ओर से इस डील को मंजूरी देने में हो रही देरी पर ट्रंप काफी नाराज नजर आ रहे हैं।

क्या है ट्रंप की नाराजगी की वजह?

व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान जब ट्रंप को बताया गया कि दक्षिण कोरिया अभी भी अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा है और उसने अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं, तो राष्ट्रपति का लहजा सख्त हो गया। ट्रंप ने दो टूक कहा कि अगर दक्षिण कोरिया ने जल्द ही इस पर दस्तखत नहीं किए, तो वे इस प्रोजेक्ट की कीमत दोगुनी कर देंगे।

क्या है 44 अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट?

यह एक विशाल प्राकृतिक गैस परियोजना है। इसके तहत अलास्का के नॉर्थ स्लोप से करीब 1,300 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जो गैस को दक्षिणी अलास्का तक लाएगी। यहां गैस को लिक्विफाई (तरल) करके जहाजों के जरिए एशियाई देशों को निर्यात किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 44 अरब डॉलर आंकी गई है।

अमेरिका का दबाव क्यों?

ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना है। अमेरिका चाहता है कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे सहयोगी देश इस प्रोजेक्ट में बड़ा निवेश करें। वाशिंगटन का मानना है कि यह निवेश न केवल व्यापारिक संतुलन बनाने में मदद करेगा, बल्कि टैरिफ से जुड़ी बातचीत को भी आसान बनाएगा।

क्या दक्षिण कोरिया पीछे हट रहा है?

दक्षिण कोरिया पहले ही अमेरिका के साथ 350 अरब डॉलर के निवेश ढांचे पर सहमति जता चुका है, जिसका हिस्सा यह पाइपलाइन प्रोजेक्ट भी है। हालांकि आधिकारिक मंजूरी में देरी हो रही है। अब ट्रंप का सीधा अल्टीमेटम सियोल पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ा रहा है।

जापान और ताइवान की स्थिति क्या है?

अन्य सहयोगियों की बात करें तो ताइवान की सरकारी ऊर्जा कंपनी CPC पहले ही गैस खरीदने को लेकर एक गैर-बाध्यकारी समझौते पर दस्तखत कर चुकी है। वहीं, ट्रंप का दावा है कि जापान भी अपने 550 अरब डॉलर के फंड के जरिए इस प्रोजेक्ट में शामिल होगा, हालांकि जापानी कंपनियों में अभी भी जोखिम को लेकर थोड़ी हिचकिचाहट देखी जा रही है।

भविष्य की राह: 2031 तक निर्यात का लक्ष्य

अगर यह प्रोजेक्ट अपने तय समय पर पूरा होता है, तो इससे प्रतिवर्ष करीब 2 करोड़ मीट्रिक टन तरलीकृत गैस (LNG) का निर्यात संभव होगा। कंपनी की योजना के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए अंतिम निवेश फैसला 2026-27 के बीच लिया जाना है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो 2031 तक अमेरिका से एशियाई बाजारों के लिए एलएनजी निर्यात शुरू हो जाएगा।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

हिंदू-मुस्लिम करना है तो पाकिस्तान जाओ : मुंबई में अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान

Story 1

बाली में बड़ा हादसा: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई पहुंचीं नुसरत भरूचा

Story 1

पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: राजा वड़िंग की विदाई, ओलंपिक खिलाड़ी परगट सिंह को मिली कमान

Story 1

मराठी अस्मिता का महापर्व: दिग्गज नेताओं ने अभिजात भाषा दिवस पर दी शुभकामनाएं

Story 1

बिग बॉस 20: रीति तिवारी का सफर खत्म, आम्रपाली के आंसू और घर में उदिति का राज

Story 1

आजादपुर की कायापलट का संकल्प: सीएम रेखा गुप्ता का सख्त रुख, अटल चौक की घोषणा

Story 1

दृश्यम 3 रिव्यू: विजय सालगांवकर की अंतिम चाल ने उड़ाए होश, अजय और जयदीप की टक्कर ने मचाया धमाल!

Story 1

एशियन गेम्स में रचा इतिहास: 16 साल के सूखे को खत्म कर नीरज चौहान ने जीता ब्रॉन्ज

Story 1

DSP बनने का सपना, हाथ में गोल्ड मेडल: एशियन गेम्स जीतकर लौटीं गोल्डन गर्ल प्राची का भव्य स्वागत

Story 1

दिल्ली में AAP को बड़ा झटका: मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने थामा कांग्रेस का हाथ