भारतीय शेयर बाजार पिछले दो सालों से एक कठिन दौर से गुजर रहा है। निफ्टी की सुस्त चाल ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। लोग इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारण गिना रहे हैं, लेकिन दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा की राय इससे बिल्कुल अलग है।
शंकर शर्मा का मानना है कि बाजार की मौजूदा कमजोरी किसी बाहरी घटना का नतीजा नहीं है। वे इसे लेक ऑफ रिटर्न्स थ्योरी (Lake of Returns Theory) से जोड़कर देखते हैं। उनके अनुसार, कोविड के बाद बाजार में जो असाधारण तेजी आई थी, उसके बाद अब यह एक ऐसे दौर में है जहां रिटर्न या तो नगण्य हैं या बहुत कम। यह एक स्वाभाविक रिटर्न साइकिल है।
शर्मा के मुताबिक, भारतीय बाजार की बड़ी कंपनियों का बिजनेस मॉडल अब एक सीमा तक पहुंच गया है। अधिकांश कंपनियां केवल घरेलू खपत पर निर्भर हैं। वे कहते हैं, पिछले तीन दशकों तक प्राइवेट बैंकों ने सरकारी बैंकों का मार्केट शेयर हथियाकर तेजी दिखाई, लेकिन अब एसेट्स बढ़ाना और मार्जिन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
शर्मा ने एक कड़वा सच उजागर किया है। वे कहते हैं कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर खुद को स्थापित नहीं कर पा रही हैं। वे उदाहरण देते हैं कि यदि आप दुबई में इलेक्ट्रिक कार ढूंढें, तो वहां कोई भारतीय विकल्प नहीं मिलेगा। उनके अनुसार, असली ग्रोथ तभी आएगी जब कंपनियां केवल भारत तक सीमित न रहकर इनोवेशन और इंटरनेशनल मार्केट में अपनी जगह बनाएंगी।
इंडेक्स के बजाय, शर्मा का जोर स्माल-कैप कंपनियों पर है। वे उन कंपनियों को लेकर बुलिश हैं जो:
रिटेल निवेशकों को आगाह करते हुए शंकर शर्मा ने कहा है कि म्यूचुअल फंड्स में अंधाधुंध निवेश से पहले टैक्स और जोखिम का आकलन जरूर करें। उनका तर्क है कि छोटे निवेशकों के लिए रिटर्न ऑन कैपिटल से ज्यादा जरूरी रिटर्न ऑफ कैपिटल (मूल पूंजी की सुरक्षा) है।
शर्मा की राय में, इक्विटी मार्केट केवल उन लोगों के लिए है जो बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव को झेलने का साहस रखते हैं। लंबी अवधि के लिए वे फिक्स्ड इनकम, गोल्ड और रियल एस्टेट को भी निवेश पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। उनका साफ संदेश है—इंडेक्स के पीछे भागने के बजाय उन बिजनेस मॉडल्स को पहचानें जिनमें असल इनोवेशन की ताकत है।
The Indian Market is giving you neither Return on Capital nor Return of Capital
— Shankar Sharma (@1shankarsharma) October 1, 2026
While derivative brokers, asset managers, wealth managers have all bought penthouses , got family office funds, and market cap, this question still begs an answer:
Where are their… pic.twitter.com/Ol0rPNM4Uj
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