हनुमान चालीसा ने बचाई जान : पीएम मोदी से बात कर भावुक हुए कैप्टन स्मित मच्छार
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नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हाल ही में हुए जानलेवा हमले के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा हर तरफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद वीडियो कॉल कर कैप्टन मच्छार से बात की और उनके साहस तथा संयम की सराहना की। इस दौरान कैप्टन ने उन खौफनाक पलों को याद करते हुए हनुमान चालीसा को अपनी ढाल बताया।

हनुमान चालीसा ने हम सबको बचा लिया

पीएम मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार बेहद भावुक हो गए। उन्होंने खुलासा किया कि कॉकपिट में जब उनके को-पायलट ने उन पर चाकू से हमला किया, तब मौत सामने देखकर वे लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। कैप्टन ने कहा, जब भी मैं मुश्किल में होता हूं, हनुमान चालीसा पढ़ता हूं। उस वक्त भी मैंने वही किया। मुझे महसूस हुआ कि हनुमान जी सिर्फ भगवान ही नहीं, मेरे रक्षक भी हैं।

गंभीर चोट के बावजूद नहीं खोया संयम

पीएम मोदी ने कैप्टन की तारीफ करते हुए कहा कि पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा है। कैप्टन मच्छार ने बताया कि हमले के बाद वे बुरी तरह घायल होकर गिर गए थे, लेकिन 11 साल के अनुभव के कारण उन्हें एहसास हो गया कि विमान नीचे की तरफ गोता (dive) लगा रहा है। गंभीर दर्द के बावजूद, वे रेंगते हुए कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोला, जिससे क्रू और यात्री अंदर आकर हमलावर को काबू कर सके।

लगा ये जिंदगी के आखिरी सेकंड हैं

कैप्टन ने पीएम को बताया कि उस वक्त उन्हें लगा कि वे अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में हैं। इसके बावजूद उन्होंने विमान को संभालने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में उन्हें जो चिकित्सा सुविधा मिली, वह बेहतरीन थी। अब उन्हें बेहतर इलाज के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उनकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

क्या हुआ था उस दिन?

बुधवार को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में सवार 174 यात्रियों के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब को-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि विमान के नीचे जाने पर यात्रियों और अन्य क्रू सदस्यों ने सूझ-बूझ के साथ स्थिति को संभाला। विमान की सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन की मां गीता बेन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके संस्कारों ने ही उन्हें इस संकट के समय में इतना धैर्य और साहस दिया है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारतीय दूसरों की जान लेने के बजाय, दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

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