पेरिस: फ्रांस इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे हिंसक छात्र आंदोलनों में से एक का सामना कर रहा है। सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में पेरिस से शुरू हुआ छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन अब देश के कोने-कोने में फैल चुका है, जिसने सरकार के लिए एक बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती खड़ी कर दी है।
हिंसा का तांडव: 600 से ज्यादा गिरफ्तारियां फ्रांस की सड़कों पर स्थिति बेकाबू हो गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अब तक 625 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हिंसा में 83 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और 32 शिक्षकों को चोटें आई हैं। उपद्रवियों ने कई स्थानों पर वाहनों और चर्चों को आग के हवाले कर दिया है, जिससे पूरे देश में दहशत का माहौल है।
400 स्कूलों में ताला हिंसा की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है। शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने घोषणा की है कि सुरक्षा कारणों से देशभर के 400 से अधिक स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है। सरकार का मुख्य जोर अब स्कूलों में शांति बहाल करने और स्थिति को सामान्य बनाने पर है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल और छात्रों का गुस्सा छात्रों के इस आक्रोश की जड़ में शिक्षा प्रणाली की खामियां हैं। वे शिक्षकों की भारी कमी, कक्षाओं में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से नाराज हैं। साथ ही, शिक्षा बजट में संभावित कटौती के खिलाफ भी छात्र लामबंद हैं। गर्मियों में कक्षाओं का अत्यधिक गर्म होना और पुराने उपकरणों का इस्तेमाल छात्रों के लिए सब्र का बांध तोड़ने वाला साबित हुआ है।
धुर वामपंथ पर आग भड़काने का आरोप फ्रांसीसी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि इस आंदोलन के पीछे धुर वामपंथी नेताओं का हाथ है। सूत्रों के अनुसार, ला फ्रांस इंसौमिसे (LFI) के नेताओं पर प्रदर्शन को उग्र रूप देने का आरोप है। हालांकि, पार्टी के सांसद लुई बोयार्ड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
सरकार की सख्त चेतावनी न्याय मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने स्पष्ट किया है कि यह अब महज शैक्षिक मांग नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का गंभीर मामला बन चुका है। डारमैनिन ने कहा, जब प्रदर्शनकारी बसों को जलाने और स्कूलों में आग लगाने लगें, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उपद्रवियों में ऐसे लोग भी शामिल हैं जो शायद छात्र नहीं हैं।
मार्सिले से टूलूज़ तक अफरा-तफरी हिंसा का दायरा केवल पेरिस तक सीमित नहीं रहा। मार्सिले में दो हाई स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया, वहीं स्ट्रासबर्ग में गाड़ियां जलाई गईं। टूलूज़ में दंगा पुलिस और युवाओं के बीच आमने-सामने की झड़पें हुईं। सरकार अब इस स्थिति से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी में है।
Absolute chaos across France:
— Dr. Maalouf (@realMaalouf) October 1, 2026
625 arrests
83 police officers attacked
32 teachers injured
Hundreds of schools burned down
Vehicles and churches set on fire
North African and far-left students have declared war against the French state. pic.twitter.com/zTSE5L0vFU
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