मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारा गया लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी कोई साधारण दहशतगर्द नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सेना का प्रशिक्षित किलिंग मशीन था। इस ऑपरेशन ने एक बार फिर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को बेनकाब कर दिया है।
कौन था मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा? मारा गया आतंकवादी मोहम्मद आसिफ, जिसे हाशिम मूसा , फौजी और सुलेमान शाह के नाम से जाना जाता था, पाकिस्तानी सेना के कुख्यात विशेष सेवा समूह (SSG) का सेवानिवृत्त हवलदार था। 23 साल तक पाक सेना में सेवा देने वाले आसिफ ने 18 साल एसएसजी के यलगर कमांडो यूनिट में बिताए थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वह 2006 से 2008 के बीच पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा टीम का हिस्सा रहा था।
अमेरिकी ट्रेनिंग और खूंखार अतीत आसिफ की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अमेरिका में वीवीआईपी सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण लिया था और अमेरिकी विशेष बलों के साथ मेडिकल कोर्स भी पूरे किए थे। 2021 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने के बाद, वह लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य अभियान कमांडर बन गया था।
आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड अधिकारियों के अनुसार, आसिफ पिछले तीन वर्षों में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हुए 12 से अधिक हमलों का मास्टरमाइंड था। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, की साजिश रचने में उसकी अहम भूमिका थी। 2023 से पीर पंजाल क्षेत्र में हुए कई घात लगाकर किए गए हमलों के पीछे उसी का हाथ था।
आतंकी ढांचे को बड़ा झटका मंगलवार देर रात बडगाम के कोराग, यूसमर्ग के ऊंचाई वाले इलाकों में सेना और सुरक्षा बलों ने एक संयुक्त अभियान चलाया। गोलीबारी के दौरान आसिफ ढेर हो गया। चिनार कोर ने पुष्टि की है कि उसके शव को बरामद कर लिया गया है और तलाशी अभियान अभी भी जारी है।
सफाई अभियान में जुटे सुरक्षा बल यह मुठभेड़ घाटी में सक्रिय आतंकी ढांचे के सफाए की एक कड़ी है। सितंबर में उधमपुर, डोडा और बडगाम में चले अभियानों में कुल पांच पाकिस्तानी आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा गया है। आसिफ के मारे जाने से लश्कर-ए-तैयबा को एक ऐसा बड़ा नुकसान हुआ है, जिसे भर पाना आतंकी संगठनों के लिए आसान नहीं होगा।
*Mohammad Asif alias Hashim Moosa was born on 07 March 1980. He joined the Pakistan Army in 2000 under service number PA-3106947 and retired with the rank of Havildar. In 2005, Mohammad Asif was inducted into the Special Services Group (SSG). He served with 4 Commando “Yalgar”… https://t.co/bQWmFFDuFF pic.twitter.com/dGgtr7fMeI
— ANI (@ANI) September 30, 2026
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