EVM से बैलेट पेपर तक: INDIA गठबंधन की आर-पार की जंग, खरगे ने चुनाव सुधार के लिए रखीं 6 बड़ी मांगें
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नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA की अहम बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खरगे ने साफ कर दिया है कि अब केवल सवाल उठाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है।

राहुल के सबूतों को किया गया नजरअंदाज खरगे ने कहा कि राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक जैसे राज्यों से ठोस सबूत दिए थे कि मतदाता सूची में हेरफेर की गई है। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब निष्पक्ष संस्था के बजाय सत्ताधारी दल के फैसिलिटेटर की तरह काम कर रहा है।

13.3 करोड़ वोटर्स पर संकट खरगे ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर देश भर में 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन आधारों पर लाखों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनमें थोड़ी भी नैतिक शर्म बची है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

EVM पर इंडिया गठबंधन का रुख सख्त EVM को लेकर खरगे ने कहा कि अब इन मशीनों पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव प्रणाली में जन-विश्वास बहाल करने के लिए अब बैलेट पेपर (मतपत्र) पर वापस लौटना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को भी पंजीकरण प्रक्रिया उलझाकर वोट देने से रोका जा रहा है।

खरगे की 6 सूत्रीय मांगें: INDIA गठबंधन ने भविष्य के चुनावों के लिए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. भविष्य के चुनावों में प्री-SIR मतदाता सूची का ही उपयोग हो।
  2. वोटर लिस्ट में होने वाले हर बदलाव में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए, जिसमें बूथ-स्तरीय जानकारी सार्वजनिक हो।
  3. किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित सूचना और अपील का मौका मिले।
  4. प्रशासनिक चूक के चलते किसी भी योग्य नागरिक का नाम लिस्ट से न कटे।
  5. EVM के बजाय फिर से बैलेट पेपर (मतपत्र) से मतदान कराया जाए।
  6. पहली बार वोट देने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जाए।

लोकतंत्र को रबर स्टैंप नहीं बनने देंगे खरगे ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर कैबिनेट मंत्री को शामिल करना, आयोग को रबर स्टैंप बनाने की साजिश है। उन्होंने अंत में संकल्प लेते हुए कहा कि गठबंधन किसी भी कीमत पर एक व्यक्ति, एक वोट, एक वैल्यू के संवैधानिक सिद्धांत के साथ समझौता नहीं करेगा।

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