दुनिया के सामने आने वाले महीनों में एक बड़े खाद्य संकट का खतरा खड़ा हो गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने दुनिया के सामने खड़े 4F संकट का खाका खींचा।
विदेश मंत्री ने 4F को वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। इसका मतलब है:
जयशंकर के अनुसार, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों ने आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन मोर्चों पर एक साथ दबाव के कारण ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं, जिससे खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो गया है।
खाद्य संकट के पीछे केवल भू-राजनीतिक युद्ध ही नहीं, बल्कि प्रकृति की मार भी शामिल है। विदेश मंत्री ने Super El Niño के संभावित प्रभाव को लेकर आगाह किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, साल के अंत तक यह स्थिति और मजबूत हो सकती है, जिसका असर फसल उत्पादन पर पड़ना तय है। शोध रिपोर्टें इसे स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक मान रही हैं।
जयशंकर के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि देश पहले से ही ऊर्जा और खाद की कमी से जूझ रहा है। पार्टी ने सवाल किया कि अगर सरकार ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाए होते, तो आज देश इस कगार पर नहीं होता।
जयशंकर की वैश्विक चेतावनी और भारत की घरेलू स्थिति में एक स्पष्ट अंतर है। हालांकि भारत ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य पिछले साल से थोड़ा कम रखा है, लेकिन कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि भारत में रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार के पास पिछले साल की तुलना में बेहतर खाद स्टॉक मौजूद है।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ये सभी मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर परिवहन और उर्वरक उत्पादन पर पड़ता है। उर्वरक की कमी से खेती की लागत बढ़ती है, और अंत में इसका खामियाजा आम जनता को महंगाई के रूप में भुगतना पड़ता है। विदेश मंत्री ने दुनिया भर के नीति-निर्माताओं से अपील की है कि वे अपने फैसले लेते समय केवल अपने हितों को न देखें, बल्कि वैश्विक निर्भरता को भी ध्यान में रखें।
नरेंद्र मोदी के मंत्री ने बता दिया कि आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का संकट आने वाला है।
— Congress (@INCIndia) September 29, 2026
देश पहले ही Energy Crisis से जूझ रहा है। खाद की भयंकर कमी है। अब खाने-पीने की चीजों पर भी संकट मंडरा रहा है।
अगर नरेंद्र मोदी ने वक्त रहते काम किया होता तो आज देश के सामने ये संकट… pic.twitter.com/EpRsxLLdcz
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