दिल्ली दंगा साजिश: उमर खालिद और शरजील इमाम को फिर झटका, हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
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दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर बड़ी कानूनी शिकस्त मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बुधवार को दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का हवाला कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कुछ शर्तें रखी थीं। शीर्ष अदालत ने कहा था कि वे एक साल बाद या गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। हाई कोर्ट ने पाया कि ये शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए जमानत देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव करने जैसा होगा, जो अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

तीसरी बार खारिज हुई खालिद की अर्जी इस मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका तीसरी बार खारिज की गई है, जबकि शरजील इमाम की याचिका दूसरी बार ठुकराई गई है। इससे पहले, निचली अदालत (कड़कड़डूमा कोर्ट) ने 4 जुलाई को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था।

कानूनी तर्क और पुलिस का पक्ष खालिद और इमाम के वकीलों ने तर्क दिया था कि एक अन्य मामले (सैयद इफ्तिखार अंद्राबी केस) में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया है, जिसके आधार पर उन्हें राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसका पुरजोर विरोध किया। पुलिस ने दलील दी कि किसी अन्य मामले में दी गई टिप्पणी, खालिद और इमाम के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए ठोस निर्देशों को बदलने का आधार नहीं बन सकती।

निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों और गुलफिशा फातिमा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मापदंडों का बारीकी से विश्लेषण किया। अदालत ने कहा कि उन्हें ट्रायल कोर्ट के आदेश में किसी भी प्रकार की कानूनी कमी नजर नहीं आती है। इन तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद हाई कोर्ट ने दोनों आरोपियों की अपील को सिरे से खारिज कर दिया।

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