एशियन गेम्स 2026: 75 साल का सूखा खत्म, बीमारी को मात देकर नायब सूबेदार नीरू ढांडा ने रचा इतिहास
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जापान के नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत को ऐतिहासिक गौरव हासिल हुआ है। हरियाणा की बेटी और सेना की नायब सूबेदार नीरू ढांडा ने महिलाओं की ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर 75 साल का सूखा खत्म कर दिया है। एशियन गेम्स के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी भारतीय महिला ने इस इवेंट में व्यक्तिगत रूप से स्वर्ण पदक जीता हो। उन्होंने 28 अंकों के स्कोर के साथ नया एशियन रिकॉर्ड भी बनाया है।

किसान परिवार से नागोया के स्वर्ण पदक तक

नीरू का जन्म 25 मई 2000 को जींद (हरियाणा) के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण शूटिंग जैसा महंगा खेल उनके लिए एक बड़े सपने जैसा था। परिवार ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी में बसने के बाद भी उनके सपनों को कभी मरने नहीं दिया। शुरुआत में उन्होंने अपने चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण से प्रेरित होकर घर की पुरानी दोनाली बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाकर अभ्यास शुरू किया था।

सेना का अनुशासन और अटूट जज्बा

नीरू के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब वह कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP) में शामिल हुईं। अपनी प्रतिभा के दम पर वे नायब सूबेदार बनीं और महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट का हिस्सा बनीं। सेना के कड़े अनुशासन और ट्रेनिंग ने उन्हें एक साधारण निशानेबाज से विश्व स्तरीय एथलीट में बदल दिया। नीरू के कोच पीटर विल्सन भी उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर भावुक नजर आए।

स्वाइन फ्लू को हराकर बनीं चैंपियन

इस स्वर्ण पदक के पीछे दर्दनाक संघर्ष भी छिपा है। गेम्स शुरू होने से महज 10 दिन पहले नीरू गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। संदिग्ध H1N1 (स्वाइन फ्लू) के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। साढ़े तीन हफ्ते तक बिना किसी ट्रेनिंग के वह बीमारी से लड़ती रहीं। पांच दिनों तक केवल पानी पर जिंदा रहने के बावजूद, नागोया के मैदान पर उतरकर उन्होंने जिस तरह सटीक निशाना लगाया, वह उनकी मानसिक मजबूती का सबसे बड़ा उदाहरण है।

शानदार रिकॉर्ड और अगला लक्ष्य

नीरू का सफर लगातार बुलंदियों को छू रहा है। जुलाई 2026 में इटली में आयोजित वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला बनी थीं। कजाकिस्तान में आयोजित एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने दो गोल्ड जीते थे। नागोया में गोल्ड के अलावा उन्होंने टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल भी अपने नाम किया है। अब महज 26 साल की नीरू की निगाहें 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर टिकी हैं।

नीरू ढांडा की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो गरीबी और बीमारी जैसी चुनौतियां भी देश का नाम रोशन करने से नहीं रोक सकतीं।

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