क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कांग्रेस कनेक्शन है? इस्तीफे की मांग के बीच जानें उनका पूरा प्रशासनिक सफर
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने उन पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की है। इस विवाद के बीच, उनके तीन दशक लंबे प्रशासनिक करियर पर भी सवाल उठ रहे हैं।

UPA सरकार के साथ रहा अहम कार्यकाल ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनके करियर के रिकॉर्ड पर गौर करें तो 2007 से 2012 के बीच वह मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार में रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिफेंस प्रोडक्शन) के पद पर तैनात थे। रक्षा उत्पादन जैसे संवेदनशील विभाग में उनकी यह नियुक्ति उनके प्रशासनिक कद को दर्शाती है।

केरल में कांग्रेस सरकार के साथ काम केवल केंद्र ही नहीं, ज्ञानेश कुमार का केरल सरकार के साथ भी गहरा नाता रहा है। साल 2012 से 2016 के बीच, जब केरल में ओमन चांडी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (UDF) की सरकार थी, तब ज्ञानेश कुमार नई दिल्ली स्थित केरल भवन में रेजिडेंट कमिश्नर की भूमिका में थे। उन्होंने केरल में वित्त, लोक निर्माण और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

मोदी सरकार में भी निभाईं बड़ी भूमिकाएं 2016 के बाद ज्ञानेश कुमार का करियर एक नए मोड़ पर आया। गृह मंत्रालय में तैनाती के दौरान उन्होंने 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और राज्य के पुनर्गठन की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा, उन्होंने सहकारिता मंत्रालय में सचिव के तौर पर भी काम किया है। 19 फरवरी 2024 को वे देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने।

प्रशासनिक निष्पक्षता बनाम राजनीतिक विवाद कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने अपनी नैतिक और संस्थागत साख खो दी है। हालांकि, प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि IAS अधिकारियों का विभिन्न सरकारों के साथ काम करना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। किसी अधिकारी का किसी विशेष सरकार के दौरान पद पर रहना उनकी राजनीतिक विचारधारा का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

विवाद की जड़ क्या है? फिलहाल SIR (Sustained Improvement of Rolls) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनावी रोल की पारदर्शिता और अखंडता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह मोर्चा तब खुला है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष लगातार हमलावर है। देखना यह होगा कि इस संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी का पुराना प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड इस राजनीतिक घमासान में किस तरह पेश किया जाता है।

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