LPU हिंसा मामला: इंफ्लुएंसर फरहत देव पर लगा तोड़फोड़ का आरोप, 30-40 छात्र जांच के घेरे में
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों ने एक नया और विवादित मोड़ ले लिया है। अब पूरा मामला यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर हुई तोड़फोड़ और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसरों की कथित भूमिका पर केंद्रित हो गया है।

छात्रा का आरोप: फरहत देव पर उठी उंगलियां यूनिवर्सिटी की छात्रा रम्या मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सनसनीखेज दावे किए हैं। रम्या का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान DSW (डीन स्टूडेंट वेलफेयर) ऑफिस में घुसने वाले पहले व्यक्ति सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फरहत देव थे।

रम्या ने आरोप लगाया कि फरहत की उपस्थिति ने छात्रों के बीच माहौल को और भड़काया, जिसके बाद वहां तोड़फोड़ की गई और छात्रों की मेहनत से जीती गई ट्रॉफियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

फरहत देव ने दी सफाई अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों के बाद फरहत देव ने सफाई पेश की है। उन्होंने तोड़फोड़ या ट्रॉफियां नुकसान पहुंचाने की बात को सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि वह दफ्तर के अंदर जरूर गए थे, लेकिन उनका मकसद हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि भीड़ को शांत करना था। फरहत ने दावा किया कि उन्हें उन कृत्यों के लिए धमकियां दी जा रही हैं जो उन्होंने किए ही नहीं।

30-40 छात्रों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें हिंसा और सरकारी संपत्ति के नुकसान के मामले में पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोनों सख्त हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब 30-40 छात्रों की पहचान की जा रही है, जो इस पूरे बवाल में सीधे तौर पर शामिल थे। इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

अफवाहों से बचने की अपील यह पूरा विवाद एक छात्रा के साथ कथित रेप और उसके बाद आत्महत्या की अफवाहों के साथ शुरू हुआ था। इस गलत सूचना ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया और परिसर में आगजनी व झड़प की घटनाएं सामने आईं।

विश्वविद्यालय की प्रो-चांसलर डॉ. रश्मि मित्तल ने छात्रों से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित फिलहाल, स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने अगले 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं। पुलिस ने भी छात्रों और जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी साझा करने से बचें, क्योंकि यह कानूनी मुसीबत का कारण बन सकता है।

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