भारत-US ट्रेड डील में देरी क्यों? जयशंकर ने आतंकवाद पर अमेरिका को आईना दिखाया
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान वाशिंगटन में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत और अमेरिका के जटिल होते रिश्तों, ट्रेड डील में देरी और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की।

ट्रेड डील में देरी की क्या है वजह?

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील की राह में आ रही रुकावटों पर विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके पीछे जटिल बुनियादी वास्तविकताएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की संरचना पूरी तरह अलग है।

जयशंकर ने तर्क दिया, भारत छोटे कृषि उत्पादकों और छोटी फैक्ट्रियों का देश है। भारत और अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय में भारी अंतर है। ऐसे में व्यापार वार्ता में दांव बहुत ऊंचे हैं और जटिलताएं भी उसी हिसाब से ज्यादा हैं।

आतंकवाद पर अमेरिका की समझ कम

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अमेरिका के रुख पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों में एक बड़ी समस्या यह है कि अमेरिका भारत की सीमा-पार आतंकवाद संबंधी चिंताओं के प्रति पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाता।

विदेश मंत्री ने तल्ख लहजे में कहा, दुनिया में बहुत कम देश होंगे जिन्होंने भारत की तरह दशकों तक सुनियोजित आतंकवाद का सामना किया हो। यह हमारे लिए बेहद अहम मुद्दा है, लेकिन इसे लेकर अमेरिका में पर्याप्त समझ या सराहना की कमी है।

रिश्तों की राह में सोशल मीडिया और जनमत की चुनौती

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक कूटनीति अब केवल नेताओं और राजनयिकों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के दौर में जनमत (Public Opinion) कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और लोगों की आवाजाही को लेकर जो जन-धारणा है, वह अक्सर कूटनीतिक उद्देश्यों के विपरीत दिशा में काम करती है। लोकतांत्रिक समाजों में इन वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रिश्ते बेहतर करने के लिए समाधान जरूरी

अंत में, विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि आपसी बातचीत से मुद्दों का हल निकलेगा। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि भारत-अमेरिका संबंध बेहतर दिशा में आगे बढ़ें। लेकिन हमें जमीनी सच्चाइयों को स्वीकार करना होगा। हम इन मुद्दों पर जितनी जल्दी और जितनी स्पष्टता से आगे बढ़ेंगे, हमारे संबंध उतने ही मजबूत होंगे।

जयशंकर के ये बयान साफ करते हैं कि हालांकि दोनों देश रणनीतिक रूप से करीब आ रहे हैं, लेकिन व्यापारिक और सुरक्षा संबंधी बुनियादी मुद्दों पर अभी भी बड़ी खाई को पाटना बाकी है।

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