IIT-IIM से सीधे जनता की अदालत तक: क्या यूपी की सियासत बदलेंगी पूर्व IAS दिव्या मित्तल?
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में अपनी कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली 2013 बैच की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है। 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से अचानक इस्तीफा देने के बाद से ही उनके अगले कदम पर सबकी नजरें थीं। अब एक महीने बाद सामने आकर उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र मंच के जरिए जनता की सियासत करेंगी।

कौन हैं दिव्या मित्तल और क्यों चर्चा में हैं?

हरियाणा की रहने वाली दिव्या मित्तल का शिक्षा और करियर का सफर बेहद शानदार रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग और IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। यूपीएससी में सफलता के बाद यूपी कैडर में उन्होंने मिर्जापुर, देवरिया, गोंडा और बरेली जैसे जिलों में डीएम और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। मिर्जापुर के दुर्गम पहाड़ी गांव लहुरियादह में पाइपलाइन से पानी पहुंचाना उनके प्रशासनिक करियर का सबसे चर्चित काम रहा है। एलबीएसएनएए (LBSNAA) में उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित अशोक बम्बावले पुरस्कार भी मिल चुका है।

सिस्टम के खिलाफ नया राजनीतिक प्रयोग?

अपने वीडियो संदेश में दिव्या ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सरकारी व्यवस्था को भीतर से देखा है और पाया है कि प्रशासनिक भूमिका में रहकर बदलाव की एक सीमा होती है। वह जाति, धर्म, बाहुबल और धनबल पर टिकी राजनीति को चुनौती देना चाहती हैं। उन्होंने सीधे तौर पर किसी पार्टी के झंडे तले जाने के बजाय आम नागरिकों को साथ लेकर एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म बनाने की बात कही है।

अरविंद केजरीवाल जैसा मॉडल या जनता की नई उम्मीद?

दिव्या की इस एंट्री की तुलना दिल्ली के अरविंद केजरीवाल के शुरुआती दिनों से की जा रही है, जो खुद भी सरकारी सेवा से बाहर आए थे। हालांकि, दिव्या मित्तल का रास्ता फिलहाल उनसे अलग है। वह किसी पार्टी के गठन के बजाय सीधे जनता से जुड़ने और अपनी बातों को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दे रही हैं। उन्होंने अपना एक व्हाट्सएप नंबर भी साझा किया है, ताकि लोग सीधे अपनी समस्याओं को उन तक पहुंचा सकें।

यूपी चुनाव 2027: किसका खेल बिगाड़ेंगी दिव्या?

उनकी एंट्री के अपने राजनीतिक मायने हैं, जो बीजेपी और विपक्ष, दोनों के लिए सिरदर्द बन सकते हैं:

सबसे बड़ी चुनौती: प्रशासन से राजनीति का सफर

आईएएस अधिकारी का स्वतंत्र नेता बनना आसान नहीं है। प्रशासन में आदेश चलता है, लेकिन राजनीति में संगठन, बूथ स्तर पर पकड़, संसाधनों का प्रबंधन और जनता के बीच सालों-साल का भरोसा कमाना पड़ता है। दिव्या मित्तल के पास प्रशासनिक अनुभव तो है, लेकिन चुनावी बिसात पर संगठन खड़ा करना और विपक्षी दलों की घेराबंदी को तोड़ना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

क्या दिव्या मित्तल 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी सीट से ताल ठोकेंगी या उनका यह मंच सिर्फ एक वैचारिक आंदोलन बनकर रह जाएगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब आने वाले समय और उनके अगले कदमों पर निर्भर करेंगे। एक बात तय है—यूपी की राजनीति में एक आउटसाइडर की एंट्री ने सियासी हलकों में हलचल जरूर पैदा कर दी है।

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