नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक प्रेस नोट ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मामले में अब विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी के एक बयान को साझा करते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
ओल्ड इज गोल्ड के जरिए कुरैशी का हमला पवन खेड़ा ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस.वाई. कुरैशी का एक वीडियो साझा करते हुए उन्हें ओल्ड इज गोल्ड करार दिया। खेड़ा ने कहा कि कुरैशी ने आयोग के संयुक्त प्रेस नोट में छिपी बेतुकी बातों को जिस तरह से उजागर किया है, वह प्रशासनिक समझ का एक बड़ा सबक है।
गलतियों की स्वीकारोक्ति है यह नया नोट डॉ. एस.वाई. कुरैशी ने आयोग के स्पष्टीकरण को उनकी अपनी ही गलतियों की स्वीकारोक्ति बताया है। उनका तर्क है कि आयोग ने प्रेस नोट में जिन नए सुधारों का वादा किया है, वे इस बात का सीधा प्रमाण हैं कि अब तक उन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा था।
क्या बिना एजेंडे के चल रही थी बैठकें? आयोग ने अपने नोट में कहा है कि अब से बैठकों का एजेंडा पहले तय होगा और कार्यवाही का विवरण रखा जाएगा। इस पर तंज कसते हुए पूर्व CEC ने पूछा कि क्या अब तक चुनाव आयोग की बैठकें बिना किसी एजेंडे के हो रही थीं? उन्होंने इसे बेहद हास्यास्पद करार दिया है।
गैरकानूनी हो सकते हैं पुराने फैसले? कुरैशी ने चेतावनी दी है कि यदि किसी चुनाव आयुक्त की असहमति को दरकिनार कर या बिना बहुमत के फैसले लिए गए हैं, तो वे सभी निर्णय कानूनी रूप से शून्य (गैरकानूनी) माने जा सकते हैं। उन्होंने मतदाता सूची संशोधन और फॉर्म 6 से जुड़ी डिजिटल प्रक्रियाओं में हुई कथित गड़बड़ियों पर भी आयोग से जवाब मांगा है।
आयोग के इस नए स्पष्टीकरण ने प्रशासनिक सुधारों के बजाय कई नए विवादों को जन्म दे दिया है। देखना यह होगा कि इन सवालों पर चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया क्या होती है।
Old is Gold.
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) September 28, 2026
The way the former Chief Election Commissioner, Dr. SY Quraishi has exposed the absurdity of the Election Commissioners’ so-called ‘collective decisions’, as reflected in their joint press note, is also a great lesson in common sense.
But, obviously, bhakts will… pic.twitter.com/4DFDJb29Km
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