मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने इसे लोकतंत्र की बहाली के लिए जरूरी बताते हुए देशभर में आक्रामक प्रदर्शन शुरू किए हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
विवाद की जड़: नागरिकता का अधिकार क्षेत्र कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का तर्क है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान नागरिकों की नागरिकता निर्धारित करना आयोग का काम नहीं है। रमेश ने नागरिकता अधिनियम, 1955 का हवाला देते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी संसद और संबंधित कानूनों के तहत आती है, न कि चुनाव आयोग के अधीन।
दिल्ली से जयपुर तक पुलिस का एक्शन दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने जमकर प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर रोड पर मार्च निकाल रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। वहीं, राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। शहीद स्मारक से चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी देखने को मिली।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में उग्र विरोध यूपी के उन्नाव में कांग्रेस का प्रदर्शन जारी रहा, जबकि मुरादाबाद में कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया। महाराष्ट्र में नासिक, पुणे और कोल्हापुर में भी कांग्रेस ने जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर बड़े आंदोलन किए। कोल्हापुर में सांसद शाहू महाराज और सतेज पाटील जैसे दिग्गज नेताओं ने भी कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर इस्तीफे की मांग उठाई।
भाजपा का पलटवार: हताशा की राजनीति कांग्रेस के इन आरोपों और प्रदर्शनों पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने तीखा पलटवार किया है। नड्डा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस और INDI गठबंधन देश की प्रगति से हताश है। उन्होंने कहा, जब नीति और विजन नहीं होता, तो भ्रम और अराजकता फैलाई जाती है। चुनाव आयोग पहले ही तथ्यों को स्पष्ट कर चुका है, लेकिन विपक्ष माहौल बिगाड़ने पर उतारू है।
नड्डा ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि झूठ को सौ बार बोलने से वह सच नहीं हो जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता विपक्ष की नकारात्मक राजनीति और उनके दोहरे रवैये को पूरी तरह समझ चुकी है।
*कांग्रेस और INDI गठबंधन देश की प्रगति से हताश है। इनके मनगढ़ंत आरोप बार-बार तथ्यों की कसौटी पर ध्वस्त हुए हैं। जब न नीति होती है, न विजन, तब भ्रम और अराजकता फैलाने का सहारा लिया जाता है।
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) September 28, 2026
चुनाव आयोग ने इनके आरोपों पर तथ्य स्पष्ट कर दिए हैं, फिर भी माहौल बिगाड़ने की कोशिश जारी है।… pic.twitter.com/WNq91Y5LrD
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