चुनाव आयोग की हाई-लेवल मीटिंग: वोटर लिस्ट और SIR को लेकर लिए गए 7 बड़े फैसले, जानें क्या बदला?
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चुनाव आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबरों और विपक्ष के हमलों के बीच, 26 सितंबर को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की मौजूदगी में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर 7 अहम फैसले लिए गए हैं।

आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन विवादों पर भी स्थिति स्पष्ट की है, जिनमें प्रक्रियागत आपत्तियों और ईसीआईनेट (ECINet) के कामकाज पर सवाल उठाए गए थे।

SIR: चुनाव आयोग के 7 बड़े निर्णय

1. BLO करेंगे घर जाकर सुनवाई: जिन मतदाताओं को विसंगतियों के चलते नोटिस मिला है, उन्हें अब दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे। अब BLO स्वयं घर जाकर दस्तावेज एकत्रित करेंगे और ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी और मतदाता किसी परिवार के सदस्य को भी प्रतिनिधि भेज सकेंगे।

2. बेघरों और गरीबों के लिए विशेष कैंप: जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रैन बसेरों और मजदूर बस्तियों में विशेष शिविर लगाकर पंजीकरण सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रक्रिया में उलझकर सूची से बाहर न रहे।

3. फॉर्म 6 का घोषणा-पत्र बरकरार: आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए फॉर्म 6 का घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही रहेगा। SIR और सामान्य मतदाता पंजीकरण की प्रक्रियाएं अब स्पष्ट रूप से अलग-अलग संचालित होंगी।

4. ECINet की स्वतंत्र समीक्षा: ईसीआईनेट पोर्टल की कार्यप्रणाली की जांच के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त के नेतृत्व में एक समिति बनेगी। इसमें आईआईटी या आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सिस्टम नियमों के दायरे में काम कर रहा है।

5. डेडलाइन में विस्तार: दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर और निपटारे की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। वहीं, महाराष्ट्र में यह तारीख क्रमशः 12 अक्टूबर और 10 नवंबर होगी।

6. छूटे हुए नाम जुड़वाने का विशेष अभियान: जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां छूटे हुए मतदाताओं और युवाओं के लिए विशेष अभियान चलेगा। गोवा का उदाहरण देते हुए आयोग ने बताया कि वहां छूटे हुए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया BLO के माध्यम से शुरू हो चुकी है।

7. कार्यप्रणाली में पारदर्शिता: अब आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले ही साझा किया जाएगा और मिनट्स (कार्यवृत्त) जारी किए जाएंगे। साथ ही, अधिकारियों की प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट हर साल 31 दिसंबर तक पूरी करना अनिवार्य होगा।

विवादों पर आयोग की सफाई

आयोग ने इन दावों को खारिज किया कि प्रक्रिया में मतभेद थे। स्पष्टीकरण के अनुसार, 24 जून 2025 से लेकर अब तक SIR को लेकर लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।

जहां विपक्ष ने आयोग के इन सुधारों को नाकाफी बताया है, वहीं एनडीए के सहयोगी दलों ने इसे स्पष्टता के लिए उठाया गया सही कदम माना है। विवाद के बीच, आयोग का अब पूरा फोकस चुनावी प्रक्रिया की सुगमता और मतदाताओं के पंजीकरण को सरल बनाने पर है।

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