चुनाव आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबरों और सियासी घमासान के बीच, 26 सितंबर को दिल्ली में बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक ने मतदाता सूची प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर 7 महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका सीधा फायदा आम मतदाताओं को होगा।
वोटर लिस्ट में नाम न होने या तकनीकी खामियों को लेकर नोटिस पाने वाले मतदाताओं को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद घर जाकर दस्तावेज लेंगे और उन्हें ईसीआईनेट (ECINet) पर अपलोड करेंगे। विशेष मामलों में सुनवाई भी ऑनलाइन ही की जाएगी।
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे रैन बसेरों, मजदूरी स्थलों और गरीब बस्तियों में विशेष शिविर लगाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम केवल दस्तावेजों की कमी या प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण मतदाता सूची से बाहर न रहे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ लगा घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप बरकरार रहेगा। साथ ही, SIR की अवधि और सामान्य मतदाता पंजीकरण के बीच प्रक्रिया को अलग-अलग रखा गया है ताकि नियमों में कोई भ्रम न रहे।
पोर्टल के कामकाज पर उठ रहे सवालों के बीच, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इसमें आईआईटी/आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि सिस्टम कानून और नियमों के दायरे में काम कर रहा है।
प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय देने के लिए दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं, महाराष्ट्र में यह तारीख 12 अक्टूबर रहेगी। इनके निपटारे के लिए भी विशेष समयसीमा तय कर दी गई है।
बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यदि किसी योग्य मतदाता का नाम छूट गया है, तो उनके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। नए मतदाता भी आवेदन कर सकेंगे। गोवा का उदाहरण देते हुए आयोग ने बताया कि वहां ऐसे मामलों में BLO खुद घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं।
आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए तय किया है कि भविष्य में सभी बैठकों का एजेंडा पहले जारी किया जाएगा और बैठक के बाद आधिकारिक मिनट्स (कार्यवृत्त) सार्वजनिक किए जाएंगे। साथ ही, अधिकारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट 31 दिसंबर तक पूरी करने का अनिवार्य निर्देश दिया गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पिछले 10 महीनों में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि बैठकों में अलग-अलग राय आना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा सहमति से लिए गए हैं। भले ही राजनीतिक दल इस पर अलग-अलग राय रख रहे हों, लेकिन इन फैसलों ने फिलहाल मतदाता पंजीकरण की जटिलताओं को सुलझाने का रास्ता साफ कर दिया है।
A meeting of the Election Commission of India was held today, 26 September 2026, at 3:00 PM at Nirvachan Sadan, New Delhi.
— Election Commission of India (@ECISVEEP) September 26, 2026
Chief Election Commissioner Shri Gyanesh Kumar and Election Commissioners Dr. Sukhbir Singh Sandhu and Dr. Vivek Joshi were present in today’s meeting.… pic.twitter.com/WZoqEIXVJq
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