उन्नाव: देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में शुमार 36,000 करोड़ रुपये की लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्नाव के दही क्षेत्र में स्थित सोनिक और बशीरतगंज टोल प्लाजा पर तीन फीट पानी भर गया है। एक्सप्रेसवे अब मुख्य मार्ग न रहकर एक जलमार्ग जैसा दिखने लगा है।
आवागमन ठप, राहगीर परेशान भारी जलभराव के कारण एक्सप्रेसवे की सर्विस सड़क पूरी तरह डूब चुकी है। आधा किलोमीटर लंबे क्षेत्र में पानी जमा होने से छोटे वाहनों का निकलना नामुमकिन हो गया है। भारी वाहनों की आवाजाही भी न के बराबर रह गई है। स्थानीय निवासियों के लिए बशीरतगंज बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है, जिससे दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
इंजीनियरिंग की बड़ी चूक या लापरवाही? विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सोची-समझी लापरवाही का नतीजा है। यदि कार्यदाई संस्था पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने समय रहते 50 मीटर लंबी और पांच फीट ऊंची कंक्रीट की दीवार बनाई होती, तो यह समस्या स्थायी रूप से खत्म हो सकती थी। पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जिसे ठीक करने में 3 लाख रुपये खर्च हुए थे, लेकिन फिर भी कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।
अधिकारियों की सफाई और चुनौती अडाणी ग्रुप के अधिकारी संजीव तिवारी का कहना है कि पानी निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारी बारिश होने पर जल निकासी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इस बयान ने प्रोजेक्ट की तकनीकी मजबूती पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंकड़ों में एक्सप्रेसवे का विशाल बजट उन्नाव जिले में ही गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण और भूमि अधिग्रहण पर लगभग 6,400 करोड़ रुपये फूंक दिए गए हैं। वहीं, मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबे इस पूरे एक्सप्रेसवे की कुल लागत 36,500 करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद बुनियादी जल निकासी व्यवस्था का न होना सिस्टम की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
अखिलेश यादव का तंज: गंगा एक्सप्रेस वाटर-वे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस जलभराव का वीडियो शेयर करते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, गंगा एक्सप्रेसवे पर बह रहीं भाजपाई भ्रष्टाचार की नदियां। नाम बदलने वालों के लिए सुनहरा अवसर, इसका नया नाम गंगा एक्सप्रेस वाटर-वे रख दें। नीर-निंदनीय!
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन केवल पानी निकालने तक सीमित रहेगा या इस इंजीनियरिंग गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
*गंगा एक्सप्रेसवे पर बह रहीं भाजपाई भ्रष्टाचार की नदियाँ।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 26, 2026
नाम बदलनेवालों के लिए सुनहरा अवसर, नया नाम रख दें : गंगा एक्सप्रेस वॉटर वे
नीर-निंदनीय! pic.twitter.com/CCqA5iXHa6
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