SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, वोटर्स के लिए बदले 5 बड़े नियम
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वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी सियासी और प्रशासनिक गहमा-गहमी के बीच, चुनाव आयोग ने आम मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। शनिवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग ने नियमों को लचीला बनाते हुए प्रक्रिया को आसान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों की उपस्थिति में लिए गए 5 बड़े निर्णय इस प्रकार हैं:

1. दफ्तर के चक्कर नहीं, घर आएंगे BLO

अब यदि आपके वोटर कार्ड में तकनीकी खामी या पते में कोई विसंगति (Logical Discrepancy) है, तो आपको निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है। अब आपके क्षेत्र के बीएलओ (BLO) खुद आपके घर आकर दस्तावेज़ लेंगे और उन्हें सीधे आयोग के ECINET पोर्टल पर अपलोड करेंगे। बहुत जटिल मामलों में ही वोटर को व्यक्तिगत रूप से बुलाया जाएगा, वह भी डिजिटल माध्यम से।

2. सुनवाई के लिए प्रतिनिधि की अनुमति

अगर किसी मामले में सुनवाई जरूरी हुई, तो भी वोटर को खुद उपस्थित होने की बाध्यता नहीं होगी। वोटर अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। इसके अलावा, दूरदराज के नागरिकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की सुविधा भी बढ़ा दी गई है।

3. दिल्ली और महाराष्ट्र में डेडलाइन बढ़ी

आयोग ने चुनावी सुगमता के लिए दो प्रमुख राज्यों में समय सीमा बढ़ा दी है:

4. वंचित वर्गों के लिए लगेंगे स्पेशल कैंप

आयोग ने जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रैन बसेरों में रहने वाले लोग, दिहाड़ी मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का नाम वोटर लिस्ट से न छूटे। इसके लिए भीड़-भाड़ वाले इलाकों में विशेष हेल्प डेस्क और जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे ताकि नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहें।

5. छूटे वोटर्स के लिए स्पेशल इनरोलमेंट ड्राइव

जिन 20 राज्यों में SIR का काम पूरा हो चुका है, वहां भी आयोग ने सतर्कता बरती है। नए युवा वोटर्स या वे नागरिक जिनका नाम किसी कारणवश लिस्ट में नहीं आ पाया, उनके लिए कंटीन्यूअस अपडेशन के तहत विशेष नामांकन अभियान (Special Enrollment Drive) चलाया जाएगा। इसके लिए फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया को सरल रखा गया है।

तकनीकी पारदर्शिता पर आयोग का रुख

ECINET पोर्टल की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब में आयोग ने एक जांच समिति का गठन किया है। इसमें सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर के साथ-साथ IIT या IIIT के स्वतंत्र तकनीकी एक्सपर्ट्स को शामिल किया गया है, जो पोर्टल की कार्यप्रणाली की निगरानी करेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप है और इसे सर्वसम्मति से लागू किया गया है।

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