समुद्र में नाविकों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ जयशंकर सख्त: UNGA में भारत ने दुनिया को दी चेतावनी
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स की उद्घाटन बैठक में स्पष्ट किया कि दुनिया भर में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमले अब बर्दाश्त से बाहर हैं।

भारतीय नाविकों की जान खतरे में विदेश मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत दुनिया में नाविकों का एक बड़ा स्रोत है और हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने ओमान की खाड़ी में MV केप दाओ पर हुए हमले का जिक्र किया, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक क्रू मेंबर के लापता होने की घटना ने भी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जहाजों पर हमलों की बढ़ती श्रृंखला डॉ. जयशंकर ने बताया कि ये घटनाएं अब इक्का-दुक्का नहीं रह गई हैं। पिछले कुछ महीनों में रूसी समुद्री सीमा से लेकर लाल सागर और खाड़ी तक, आम व्यापारिक जहाजों को बार-बार निशाना बनाया गया है। उन्होंने 18 जुलाई को MV ओमोर्फी और अगले दिन MV गोल्डन लियो पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी चपेट में सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के नाविक भी आए हैं।

समुद्री व्यापार की सुरक्षा अनिवार्य वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया का 80 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्र के जरिए होता है। हर दिन लगभग 140 बिलियन डॉलर का माल समुद्री रास्तों से गुजरता है। यदि ये रास्ते असुरक्षित होंगे, तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन हमलों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव भारत ने इस संकट से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति पेश की है। विदेश मंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव दिया था। यह नेटवर्क विभिन्न देशों के समुद्री अधिकारियों और दूतावासों को एक साथ जोड़ेगा, जिससे संकट के समय चिकित्सा सहायता, परिवारों से संपर्क और नाविकों को सुरक्षित निकालने में त्वरित मदद मिल सकेगी।

भारत ने साफ कर दिया है कि समुद्री व्यापार को बाधित करने और निर्दोषों की जान लेने वाली ताकतों को किसी भी स्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

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