सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति की दरियादिली ने लोगों का दिल जीत लिया है। नरेश नाम के एक शख्स ने अपने ड्राइवर और मेड (घरेलू सहायिका) के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है।
क्या है मामला? नरेश ने महसूस किया कि उनके साथ काम करने वाले दोनों कर्मचारियों के पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या प्रोविडेंट फंड नहीं है। उनकी इस चिंता ने उन्हें एक बड़ा फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दोनों के नाम पर किसान विकास पत्र (KVP) योजना में 25-25 हजार रुपये का निवेश किया।
10 साल में होगी राशि दोगुनी नरेश ने अपनी पोस्ट में बताया कि यह निवेश करीब 10 साल में दोगुना हो जाएगा। उनका इरादा यहीं नहीं रुकने का है; वे हर साल इसी राशि को निवेश में बढ़ाने की योजना बना रहे हैं ताकि उनके कर्मचारियों को बुढ़ापे में एक सम्मानजनक आर्थिक संबल मिल सके।
नियोक्ताओं से की खास अपील नरेश ने अन्य नियोक्ताओं से भी अपील की है कि वे अपने वफादार कर्मचारियों के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि बड़ी रकम ही दी जाए, बल्कि 10,000 रुपये जैसी छोटी शुरुआत से भी भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर मिल रही तारीफ नरेश की यह पहल इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है। एक यूजर ने उन्हें सोने के दिल वाला इंसान बताया, तो वहीं अन्य लोगों ने इस नेक और दयालु भाव की जमकर सराहना की है। हालांकि, कुछ लोगों ने इस पर व्यावहारिक चर्चा भी छेड़ी है कि वफादार कर्मचारी मिलना कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
असंगठित क्षेत्र के लिए एक मिसाल भारत में बड़ी संख्या में घरेलू कामगार असंगठित क्षेत्र से आते हैं, जिनके पास सामाजिक सुरक्षा का अभाव होता है। अक्सर लोग केवल वेतन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, लेकिन नरेश की यह पहल दिखाती है कि एक छोटा सा वित्तीय निवेश किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
नरेश, जो पहले से सड़क सुरक्षा के समर्थक के रूप में जाने जाते हैं, अब नियोक्ताओं के लिए एक नई मिसाल बनकर सामने आए हैं। यह वाकया हमें याद दिलाता है कि सहानुभूति और जिम्मेदारी के साथ किए गए कार्य न केवल कर्मचारियों का जीवन बदलते हैं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी फैलाते हैं।
I realised my two employees, my Driver and my cook/maid/housekeeper don’t have any pension /provident fund.
— Naresh (@TopDriverIndia) September 23, 2026
So I made a small beginning by opening a Kisan Vikas Patra for Rs.25,000 for each which will double in 10 years. I’m thinking I’ll contribute this same amount once every… pic.twitter.com/7VRGrYOP4c
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