विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और कांग्रेस के बीच तनातनी चरम पर है। आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे बोगस करार दिया है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
आयोग की सफाई पर उठे सवाल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम कटने और तकनीकी खामियों जैसे गंभीर सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है। पार्टी का कहना है कि आयोग केवल अपनी प्रक्रिया का बचाव कर रहा है, जबकि उसे जवाबदेही तय करनी चाहिए थी।
गोवा का मामला बना ढाल कांग्रेस ने गोवा के 97 मतदाताओं का उदाहरण दिया, जिनके नाम सूची से गायब थे। इनमें से 81 लोगों को दोबारा फॉर्म-6 भरना पड़ा। कांग्रेस का सवाल है कि यदि पात्र मतदाता प्रशासनिक चूक के कारण सूची से बाहर हुए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रार चुनाव आयोग ने अपने बचाव में 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। हालांकि, जयराम रमेश ने तर्क दिया कि यह फैसला ताजा विवादों और तकनीकी खुलासों के पहले का है, इसलिए इसे वर्तमान समस्याओं को खारिज करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
दिल्ली-महाराष्ट्र तक सीमित राहत क्यों? आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR की समयसीमा बढ़ा दी है और घर-घर जाकर दस्तावेज लेने की सुविधा दी है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए पूछा है कि यही सुविधा कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के लिए क्यों नहीं है? पार्टी का मानना है कि सभी राज्यों में समान अवसर मिलना चाहिए।
फॉर्म-6 और तकनीकी बोझ नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में माता-पिता के पुराने SIR रिकॉर्ड की जानकारी अनिवार्य करने पर भी विवाद है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे पहली बार वोट देने वाले युवाओं पर बेवजह दस्तावेजी बोझ बढ़ गया है। पार्टी ECINET प्रणाली के अत्यधिक केंद्रीकरण को भी लोकतंत्र के लिए खतरा मान रही है।
इस्तीफे की मांग पर अड़ी कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय लेने और पक्षपात का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है। फिलहाल, चुनाव आयोग ने प्रक्रिया रोकने के बजाय तकनीकी समीक्षा और राहत उपायों की घोषणा की है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।
हमारे लोकतंत्र को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाने के बाद अब चुनाव आयोग डैमेज कंट्रोल मोड में है। उसने एक गोलमोल प्रेस नोट जारी किया है, जो उसकी नीयत, ईमानदारी, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर और भी सवाल खड़े करता है। इस बोगस प्रेस नोट पर हमारी यह प्रतिक्रिया है। pic.twitter.com/DLYpkDEgKK
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 26, 2026
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