अखाड़े की कुश्ती से शूटिंग रेंज के गोल्ड तक: सुरुचि सिंह की संघर्ष भरी कहानी
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एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों का जलवा बरकरार है। 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में सुरुचि सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया है। लेकिन इस चमकती कामयाबी के पीछे एक ऐसी कहानी है, जो किसी फिल्म से कम नहीं है।

अजेय रही भारतीय जोड़ी और नया रिकॉर्ड फाइनल मुकाबले में भारतीय निशानेबाजों ने अपनी सटीकता से दक्षिण कोरिया को पछाड़ते हुए 484.6 अंक हासिल किए। इस जीत के साथ ही उन्होंने उज्बेकिस्तान के 481.3 अंकों के पुराने एशियाई रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। प्रतियोगिता में दक्षिण कोरिया ने सिल्वर और ईरान ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

चोट ने बदली खेल की दिशा सुरुचि की इस जीत के पीछे एक बड़ा संघर्ष है। उनकी मां सुदेश के अनुसार, परिवार सुरुचि को भविष्य में एक सफल पहलवान बनाना चाहता था। अभ्यास के दौरान सुरुचि के कॉलरबोन (कॉलर की हड्डी) में गंभीर चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें कुश्ती को अलविदा कहना पड़ा। इसी चोट ने सुरुचि को अखाड़े से हटाकर शूटिंग रेंज की ओर मोड़ दिया।

पिता का बड़ा त्याग सुरुचि के सपनों को पंख देने के लिए उनके पिता ने एक साहसिक निर्णय लिया। अपनी बेटी और बेटे को शूटिंग का पेशेवर प्रशिक्षण देने के लिए उन्होंने भारतीय सेना की नौकरी तक छोड़ दी। आज उनके दोनों बच्चे शूटिंग में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो पिता के उस त्याग की सार्थकता को साबित करता है।

घर लौटने पर होगा खास स्वागत सुरुचि की जीत से उनके गांव में खुशी का माहौल है। मां सुदेश ने बताया कि जब सुरुचि घर लौटेंगी, तो उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ किया जाएगा। सुरुचि के लिए घर पर उनका पसंदीदा व्यंजन दाल-चूरमा तैयार किया जा रहा है।

शुद्ध देशी खान-पान और एकाग्रता सुरुचि की मानसिक एकाग्रता का राज उनके खान-पान को माना जाता है। उनकी मां के अनुसार, सुरुचि हमेशा घर का बना शुद्ध देशी घी खाती हैं। घर में पली गाय का दूध और घी ही उनकी फिटनेस और खेल के प्रति एकाग्रता का मुख्य आधार रहा है। जीत के तुरंत बाद सुरुचि ने अपनी मां को फोन कर ऐतिहासिक सफलता की खुशी साझा की।

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