CEC ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर संकट? अपनों ने ही चुनाव आयोग से मांगा जवाब
News Image

चुनाव आयोग (ECI) के भीतर मची आंतरिक खींचतान अब संवैधानिक संकट का रूप लेती दिख रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों के बीच मतभेदों की खबरें सार्वजनिक होने के बाद न केवल विपक्ष, बल्कि सरकार के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। मोदी सरकार के तीन प्रमुख सहयोगियों - चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आयोग के अंदर का विस्फोट

विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट से हुई, जिसमें दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। मामला वोटर लिस्ट के फॉर्म 6 में बदलाव और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है। इन खुलासों ने लोकतंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

चिराग पासवान: संस्था की साख सर्वोपरि

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सरकार का बचाव करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। चिराग ने कहा, सरकार में होने का मतलब यह नहीं कि मैं आयोग का बचाव करूं। अगर चुनावी प्रक्रिया से लोगों का भरोसा डिग गया, तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा। आयोग को जनता के मन में बैठी शंकाओं को दूर करना चाहिए।

उपेंद्र कुशवाहा की दो टूक मांग

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए आयोग को घेरा। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर जनता के बीच भारी भ्रम की स्थिति है। कुशवाहा ने चुनाव आयोग से तुरंत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है ताकि इस पूरे प्रकरण से जुड़ी गलतफहमियां दूर हो सकें।

टीडीपी ने दी पारदर्शिता की नसीहत

एनडीए की प्रमुख सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी इस बहस में अपनी बात रखी। पार्टी के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि यद्यपि आंध्र प्रदेश में प्रक्रिया पारदर्शी रही, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर आयोग की लंबी चुप्पी उचित नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी संवैधानिक संस्था पर उंगली उठने पर सच सामने रखना ही भरोसे की कुंजी है।

चुनाव आयोग और सरकार का रुख

विवाद बढ़ने के बाद आयोग ने सफाई दी है कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग का कहना है कि सभी फैसले अंततः सर्वसम्मति से ही लिए गए थे। भाजपा ने भी इसे संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताते हुए इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी है।

विपक्ष का आक्रामक रुख

दूसरी ओर, विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग तेज कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या चुनाव आयोग अपनी चुप्पी तोड़कर कोई विस्तृत जवाब पेश करता है, या यह राजनीतिक विवाद और गहराता जाएगा।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

सुखपाल खैहरा पर भड़कीं AAP नेत्री गायत्री बिश्नोई: बेटी की उम्र की लड़की पर की ओछी टिप्पणी, अब जेल भेजकर ही दम लूंगी

Story 1

लव एंड वॉर में विक्की कौशल का खूंखार लुक: क्या रणबीर कपूर पर भारी पड़ेंगे विक्की?

Story 1

36 हजार करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे बना स्वीमिंग पूल : पहली बारिश में ही डूबी करोड़ों की इंजीनियरिंग

Story 1

पश्चिम बंगाल में सियासी हिंसा: मेदिनीपुर में बीजेपी कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या, इलाके में भारी तनाव

Story 1

छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान : सुशासन और जनसेवा का नया अध्याय

Story 1

रोहित शर्मा ने खोला राज: टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद विराट को गले लगाने के पीछे की असली कहानी

Story 1

अप्रूवर बन जाइए वरना जेल जाइए : CEC ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का तीखा हमला, इस्तीफे की मांग तेज

Story 1

बैंक हड़ताल से पहले बड़ी राहत: अब ATM ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

Story 1

ढोल की थाप पर थिरका रोबोट: इंसानी डांसर्स को दी टक्कर, वीडियो देख दंग रह गई दुनिया

Story 1

मनीष सिसोदिया के साथ फोटो पर विवाद: कौन हैं AAP नेत्री गायत्री बिश्नोई और क्यों भड़कीं कांग्रेस विधायक पर?