देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी दी है। विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग के एक व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉट से हुई है, जिसे लेकर अभिषेक बनर्जी ने तीखे सवाल किए हैं।
अभिषेक बनर्जी का सनसनीखेज दावा टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अप्रैल महीने के कुछ स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। उनका आरोप है कि यह एक ऑब्जर्वर ग्रुप का चैट है, जो वोटर लिस्ट से 30 लाख नाम हटाने की कथित साजिश की ओर इशारा करता है। बनर्जी ने कहा कि इसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और खामोशी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार और CJI सूर्यकांत को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि देश को इन गंभीर सवालों का जवाब चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने दर्ज कराई एफआईआर इससे पहले, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। मोइत्रा ने उन पर कानूनी छूट का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों को सामूहिक संस्था के रूप में काम करने पर ही सुरक्षा मिलती है, लेकिन यहां दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी) ने 14 बार फैसलों पर असहमति जताई है।
सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ का आरोप महुआ मोइत्रा ने निर्वाचन आयोग की डीजी (आईटी) सीमा खन्ना पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि बैक-एंड सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ की गई ताकि ब्लॉक-लेवल अधिकारियों को अंधेरे में रखकर वोटर लिस्ट में फेरबदल किया जा सके। मोइत्रा ने कहा कि बंगाल में 33 लाख वैध वोटरों को बिना किसी ठोस आधार के बाहर रखा गया। जब दूसरे चुनाव आयुक्तों ने इस पर सवाल उठाए, तो ज्ञानेश कुमार के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था।
लोकतंत्र की पवित्रता पर संकट विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता ही लोकतंत्र की असली ताकत है। वर्तमान विवाद चुनाव आयोग के आंतरिक फैसलों में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार इन आरोपों का स्पष्टीकरण देंगे या यह मामला संवैधानिक संकट की ओर बढ़ेगा।
This screenshot from a WhatsApp group of observers goes back to April. It raises serious questions about an alleged conspiracy to delete 30 lakh names from the electoral rolls.
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) September 24, 2026
This cannot be brushed aside. It cannot be buried. And it cannot be answered with silence.
Gyanesh… pic.twitter.com/JVDTDnlD3y
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