चुनाव आयोग की डीजी सीमा खन्ना: निष्पक्षता पर सवाल या विपक्ष की सियासी साजिश?
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भारतीय चुनाव आयोग (ECI) इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के बाद अब आयोग की आईटी (IT) विभाग की महानिदेशक (DG) सीमा खन्ना विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। उन पर वोटर लिस्ट के साथ छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

कौन हैं सीमा खन्ना?

सीमा खन्ना 2025 में नेशनल इन्फर्मेटिक्स सेंटर (NIC) से डेप्युटेशन पर चुनाव आयोग में शामिल हुई थीं। आईआईटी दिल्ली से इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में पीएचडी धारक सीमा खन्ना के पास आईटी और साइबर सुरक्षा का 25 वर्षों का अनुभव है। आयोग में आने के बाद उन्होंने ECINet सॉफ्टवेयर लॉन्च किया, जिसने चुनाव आयोग के 40 से अधिक ऐप्स और पोर्टल्स को एक प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया।

क्या हैं गंभीर आरोप?

विपक्ष का मुख्य आरोप ECINET और ERONET सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर है। आरोप है कि इस सिस्टम के जरिए वोटर लिस्ट के डेटा का पूरा एक्सेस दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के आईटी विभाग के पास केंद्रित हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि स्थानीय स्तर के अधिकारियों (ERO) के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है और डेटा एक्सेस सीधे सीमा खन्ना के नियंत्रण में आ गया है, जिससे वोटर लिस्ट में नामों को जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

महुआ मोइत्रा और कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने सीमा खन्ना और CEC ज्ञानेश कुमार पर आपराधिक आचरण का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस केंद्रीकरण पर चिंता जाहिर की है। उनका तर्क है कि सभी पोर्टल्स को एक जगह समेटकर सारी शक्तियां चुनाव आयोग के चुनिंदा अधिकारियों के हाथों में सौंप दी गई हैं।

विपक्ष का दावा: बैक-एंड से हो रही धांधली

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने सीधे तौर पर सीमा खन्ना के सॉफ्टवेयर पर हेरफेर की आशंका जताई है। विपक्ष का आरोप है कि जिन अधिकारों का इस्तेमाल ब्लॉक-लेवल अधिकारियों (BLO) और ERO को करना चाहिए, उनका इस्तेमाल आईटी विभाग के बैक-एंड से किया जा रहा है।

अब आगे क्या?

विपक्षी दलों ने मांग की है कि चुनाव आयोग को इस डिजिटल सिस्टम की पारदर्शिता को लेकर जवाब देना चाहिए। फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चुनाव आयोग के डिजिटल ढांचे में बदलाव को लेकर छिड़ा यह विवाद आगामी चुनावों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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