महाराष्ट्र के आदिवासी आवासीय स्कूलों से एक अत्यंत संवेदनशील और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां 13 साल से अधिक उम्र की छात्राओं को छुट्टियों के बाद हॉस्टल लौटने पर चरित्र शुद्धता के नाम पर प्रेग्नेंसी टेस्ट (गर्भावस्था परीक्षण) कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में लग रही छात्राओं की कतार रिपोर्ट्स के अनुसार, पोला त्योहार की छुट्टी के बाद जब छात्राएं घोटी और कलवण कस्बे के हॉस्टल्स में लौटीं, तो उन्हें सरकारी अस्पताल जाने का निर्देश दिया गया। वहां मासूम छात्राओं के हाथों में प्रेग्नेंसी निगेटिव लिखा मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट थमाया जा रहा है। यह प्रक्रिया छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य और गरिमा पर सीधा हमला है।
अभिजीत दिपके ने खोली पोल इस गंभीर मुद्दे को सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने प्रमुखता से उठाया है। नागपुर में छात्राओं से मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है। एक छात्रा ने बताया कि एडमिशन के समय भी हॉस्टल प्रशासन ने उसे प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने के लिए मजबूर किया था, जिसके लिए उसे अपने भाई के साथ अस्पताल जाना पड़ा था।
मासूम छात्राओं का दर्द: बहुत शर्म आती है इस अपमानजनक प्रक्रिया से गुजर रही छात्राओं ने अपना दर्द बयां किया है। आठवीं कक्षा की एक 14 वर्षीय छात्रा ने कहा, छुट्टी के बाद स्कूल लौटने पर यह टेस्ट कराना पड़ता है। इस दौरान दूसरे बच्चे चिढ़ाते हैं और बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। मजबूरी में पिता को भी साथ ले जाना पड़ता है। वहीं, दसवीं की एक छात्रा ने बताया कि उसे दूसरी बार इस परीक्षण से गुजरना पड़ रहा है। गांव के लोग इस पर हंसते हैं, लेकिन स्कूल में बने रहने के लिए यह अपमान सहना पड़ता है।
मंत्री ने किया इनकार, साख पर उठे सवाल हालांकि, इस पूरे मामले पर जब राज्य के आदिवासी विकास मंत्री से सवाल किया गया, तो उन्होंने ऐसी किसी भी आधिकारिक जांच से साफ इनकार कर दिया है। सवाल यह उठता है कि अगर कोई आधिकारिक आदेश नहीं है, तो फिर छात्राओं को हॉस्टल प्रशासन द्वारा अस्पताल क्यों भेजा जा रहा है?
मानवाधिकार का उल्लंघन यह घटना न केवल बच्चों के निजता के अधिकार का हनन है, बल्कि शिक्षा के माहौल को भी कलंकित करती है। जिस उम्र में बच्चियों को सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए, उन्हें इस तरह के संदेहास्पद और अपमानजनक व्यवहार का शिकार बनाया जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
*Tribal girls living at hostels in Maharashtra are being to undergo pregnancy test.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 16, 2026
Why these girls are being subjected to such humiliation? pic.twitter.com/4kcnlzDWHT
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