महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक हालिया मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने आयोग के कामकाज को संवैधानिक संकट के रूप में पेश किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त मालिक नहीं पृथ्वीराज चव्हाण ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संस्था है। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के 1995 के टीएन शेषन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) कोई बॉस नहीं हैं। सभी तीन आयुक्तों को समान अधिकार प्राप्त हैं।
बिना चर्चा के लिए जा रहे फैसले? चव्हाण ने मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आयोग के अन्य दो सदस्यों की सलाह लिए बिना ही कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। उन्होंने इसे गोरखधंधा करार देते हुए कहा कि जनता को लगता है कि यह आयोग का सामूहिक निर्णय है, जबकि असल में वह केवल मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यक्तिगत फैसला होता है।
सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान की अपील कांग्रेस नेता ने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को इस खबर पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए संबंधित फाइलें मंगवानी चाहिए और यदि आवश्यक हो, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित भी करना चाहिए।
विपक्ष से महाभियोग का आह्वान मामले की गंभीरता को देखते हुए चव्हाण ने विपक्षी दलों से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने पूछा, अगर संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर ही संदेह पैदा हो जाए, तो हम देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
इस बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। आयोग की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
VIDEO | Former Maharashtra CM and Congress leader Prithviraj Chavan (@prithvrj) says, Look, the news that was published today and the revelations about the how election commission is functioning raise a very serious issue. This matter goes beyond the SIR... The Election… pic.twitter.com/9siEG5cw3K
— Press Trust of India (@PTI_News) September 23, 2026
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