अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US FED) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद अब भारतीय निवेशकों की निगाहें RBI की अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हैं। बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या रिजर्व बैंक भी दरों में इजाफा करेगा। एक निवेशक के तौर पर यह जानना जरूरी है कि ब्याज दरों का सीधा असर आपके पोर्टफोलियो और शेयरों की वैल्यूएशन पर कैसे पड़ता है।
दिग्गज निवेशक देविना मेहरा के अनुसार, ब्याज दरों का असर केवल लोन या FD तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शेयर बाजार की वैल्यूएशन यानी प्राइस टू अर्निंग्स (P/E) रेश्यो को सीधे प्रभावित करता है। इसे समझने के लिए अर्निंग्स यील्ड (Earnings Yield) को समझना जरूरी है। P/E का उल्टा अर्निंग्स यील्ड होता है (1/PE = Earnings Yield)। उदाहरण के लिए, यदि किसी शेयर का P/E 20 है, तो उसकी अर्निंग्स यील्ड 5% होगी।
ब्याज दरें बढ़ने पर सुरक्षित निवेश, जैसे सरकारी बॉन्ड और FD, अधिक आकर्षक हो जाते हैं। जब सुरक्षित एसेट्स पर अच्छा रिटर्न मिलने लगता है, तो इक्विटी निवेशकों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। ऐसे में, यदि निवेशकों को शेयर बाजार में रिस्क लेना है, तो उन्हें बॉन्ड की तुलना में कहीं बेहतर रिटर्न की उम्मीद होती है। नतीजतन, बाजार का एक्सेप्टेबल P/E मल्टीपल यानी वह कीमत जो निवेशक चुकाने को तैयार हैं, घट जाता है।
ब्याज दरें बढ़ने का असर कंपनियों पर अलग-अलग होता है। जो कंपनियां आज मजबूत प्रॉफिट कमा रही हैं, उन पर असर कम होता है। लेकिन, जिन कंपनियों का वैल्यूएशन भविष्य के मुनाफे की उम्मीद (Future Growth) पर टिका है, उन पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है। ऐसी कंपनियां अक्सर ग्रोथ स्टॉक्स कहलाती हैं।
इसे टाइम वैल्यू ऑफ मनी के सिद्धांत से समझा जा सकता है। आज मिलने वाले 100 रुपये भविष्य में मिलने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्यवान होते हैं, क्योंकि आप आज के पैसे को निवेश कर उस पर ब्याज कमा सकते हैं। ब्याज दरें जितनी अधिक होंगी, भविष्य में मिलने वाले मुनाफे की आज की वैल्यू (Discounted Value) उतनी ही कम होगी।
AI जैसी कंपनियां, जिनका आज का मुनाफा कम है लेकिन भविष्य में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद है, उन्हें कम ब्याज दर वाले माहौल में ऊंचा P/E मल्टीपल मिलता है। हालांकि, ब्याज दरें बढ़ने पर इन कंपनियों के भविष्य के मुनाफे को भारी डिस्काउंटिंग का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि रेट हाइक के दौरान High-Growth और High-P/E वाले स्टॉक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिलती है, भले ही कंपनी का बिजनेस मॉडल कितना भी मजबूत क्यों न हो।
Interest rates go up.
— Devina Mehra (@devinamehra) September 17, 2026
Should you worry about your stocks?👀
At least in theory you should - but the impact isn’t the same for every company.
When rates rise, the way investors value stocks can change.
And this becomes especially interesting when you look at P/E ratios, growth… pic.twitter.com/lyHGJDBFc4
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