चुनाव आयोग में आंतरिक फूट पर घमासान: कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, दिल्ली-हरियाणा चुनाव रद्द करने की मांग
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चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर आयोग के भीतर मचे मतभेद के खुलासे के बाद कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर संस्था को हाईजैक करने का आरोप लगाया है।

अभिषेक मनु सिंघवी का बड़ा हमला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संस्था नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, ज्ञानेश कुमार ने देश को भ्रमित किया है और अपने साथियों (अन्य चुनाव आयुक्तों) को दरकिनार कर आयोग को हाईजैक कर लिया है। एक व्यक्ति विशेष द्वारा चलाए जा रहे इस आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह है, इसलिए दिल्ली और हरियाणा विधानसभा चुनाव रद्द होने चाहिए।

क्या है चुनाव आयोग के भीतर का विवाद? हालिया खुलासों के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—के बीच गंभीर मतभेद हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने 14 बार औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने, नए नाम जोड़ने और फॉर्म 6 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उनसे चर्चा किए बिना ही मनमाने फैसले लिए गए।

बहुमत की संस्था पर सवाल सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के 1995 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक बहुमत वाली संस्था है, न कि किसी एक व्यक्ति की जागीर। उन्होंने पूछा, क्या अन्य दो चुनाव आयुक्त सिर्फ डमी हैं? नियमानुसार कोई भी बड़ा फैसला तीनों आयुक्तों की सहमति से होना चाहिए, लेकिन यहां ज्ञानेश कुमार बिना जानकारी दिए फैसले ले रहे हैं, जो सीधे तौर पर तानाशाही है।

वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर धड़ल्ले से वोट चोरी की गई है। सिंघवी ने कहा कि हजारों ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें काम करने के लिए जरूरी एक्सेस नहीं दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के कामकाज में सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से बदलाव किए गए।

इस्तीफे की उठ रही मांग कांग्रेस का सीधा आरोप है कि ज्ञानेश कुमार केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि संवैधानिक संस्था की गरिमा दांव पर लगी है और पारदर्शिता खत्म हो चुकी है। कांग्रेस ने मांग की है कि आयोग के भीतर चल रही इस आंतरिक कलह और मनमाने फैसलों की गहन जांच होनी चाहिए, और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए संदिग्ध चुनावों को रद्द कर फिर से प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।

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