टाटा ग्रुप में घमासान: शरद पवार ने किया टाटा ट्रस्ट का समर्थन, दी बड़ी नसीहत
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टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच छिड़े विवाद पर एनसीपी प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पवार ने ग्रुप की मौजूदा लीडरशिप और गवर्नेंस के मसले पर चिंता जताते हुए एक खुला पत्र जारी किया है।

अंदरूनी विवाद पर सीधी सलाह शरद पवार ने साफ तौर पर कहा है कि टाटा ग्रुप के भीतर चल रहे लीडरशिप के मसलों को आपसी बातचीत और सही प्रक्रिया के जरिए सुलझाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन ही वह रास्ता है, जिसके तहत इन विवादों का समाधान निकाला जाना चाहिए।

क्या है ट्रस्ट का पक्ष? पवार ने टाटा ट्रस्ट के अधिकारों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के पास कंपनी का मालिकाना हक नहीं होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जमशेदजी टाटा का विजन था कि कंपनी से अर्जित संपत्ति समाज को वापस मिले। टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी विजन का हिस्सा है, ताकि बिजनेस का बड़ा हिस्सा समाजसेवा में खर्च हो सके।

महाराष्ट्र और देश के लिए अहम योगदान पूर्व मंत्री ने टाटा ग्रुप द्वारा स्थापित संस्थानों का जिक्र करते हुए कहा कि टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, TIFR, TISS और NCPA जैसे प्रतिष्ठित संस्थान ट्रस्ट की देन हैं। पवार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ट्रस्ट को कमजोर करना उन संस्थानों को कमजोर करने जैसा है, जिन पर पूरा देश निर्भर है।

नियुक्ति पर मचा है बवाल गौरतलब है कि बीते दिनों एन चंद्रशेखरन को फिर से एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने के फैसले पर टाटा ट्रस्ट और बोर्ड के बीच मतभेद सामने आए थे। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले के खिलाफ वोट दिया था। उनका तर्क है कि नियमों के मुताबिक, चेयरमैन की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट द्वारा नामित सभी डायरेक्टर्स का समर्थन अनिवार्य है।

विरासत की रक्षा की अपील शरद पवार ने इस बात पर जोर दिया कि टाटा ग्रुप केवल एक व्यावसायिक घराना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संस्थान है। उन्होंने अपील की है कि ग्रुप की चेरिटेबल ओनरशिप वाली विरासत की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए, ताकि यह संस्थान भविष्य में भी राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान दे सके।

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