नई दिल्ली/लखनऊ: चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान और मतभेदों की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयुक्तों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
14 बार दर्ज कराई गई आपत्ति मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के निर्णयों पर कम से कम 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। एक दिन में चार बार तक असहमति जताने की घटनाएं सामने आई हैं। ये आपत्तियां उन फैसलों के खिलाफ थीं जो कथित तौर पर आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे।
अखिलेश यादव का तीखा तंज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव ने लिखा, यह बेहद गंभीर समाचार है। इसका सीधा मतलब है कि चुनाव आयुक्त अपना काम सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है, तो यह स्थिति देश के लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
सत्ता की कठपुतली बनने का आरोप सपा प्रमुख ने इसे संवैधानिक अपराध करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा दिया जा रहा है। अखिलेश के अनुसार, यह लोकतंत्र को समाप्त करने के किसी बड़े षड्यंत्र से कम नहीं है।
विवाद की जड़: क्या है मामला? आयोग में मतभेद तब खुलकर सामने आए जब जून 2025 में बिहार से SIR (Systematic Identification of Registrants) प्रक्रिया की शुरुआत की गई। इसके बाद देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। इसी प्रक्रिया के दौरान नए पंजीकरण, पुराने वोटर्स के नाम काटने और अपीलों को लेकर आयोग के भीतर तीखा असंतोष पनपा।
चुनाव आयोग का पक्ष विवाद और आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपनी सफाई पेश की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आंतरिक मतभेदों के बावजूद, अंतिम निर्णय हमेशा सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं। फिलहाल, इन खबरों ने देश की सबसे बड़ी चुनावी संस्था की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
*ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 23, 2026
इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की… pic.twitter.com/UoQnYWsWd8
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