संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने ईरान और क्यूबा पर तीखे हमले किए, जिसके चलते दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
ईरान को डील या तबाही का अल्टीमेटम ट्रंप ने ईरान को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तेहरान के सामने अब केवल दो ही रास्ते हैं: या तो वे अमेरिका के साथ एक नया समझौता करें, जिससे देश का पुनर्निर्माण संभव हो सके, या फिर कठोर सैन्य कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहें। ट्रंप ने दोहराया कि वे किसी भी सूरत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक अपने भाषण में ट्रंप ने ईरान को दुनिया में आतंकवाद फैलाने वाला सबसे बड़ा देश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 51 वर्षों से ईरान की कट्टरपंथी सरकार ने खून-खराबे और हत्याओं के दम पर शासन चलाया है। इस टिप्पणी के करीब 10 मिनट बाद ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल सदन से बाहर निकल गया। हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री उस समय हॉल में मौजूद नहीं थे।
क्यूबा को बताया विफल राज्य ईरान के बाद ट्रंप का निशाना क्यूबा बना। उन्होंने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार की आलोचना करते हुए उसे फेल्ड स्टेट (विफल राज्य) करार दिया। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी प्रशासन की नीतियों के कारण क्यूबा पर भारी दबाव है और जल्द ही वहां सत्ता परिवर्तन के साथ स्वतंत्रता आएगी। इस कड़े प्रहार के बाद क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने भी विरोध स्वरूप हॉल छोड़ दिया।
सुरक्षित ठिकाना बर्दाश्त नहीं ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने पड़ोस या कहीं भी अपने विरोधियों को सुरक्षित ठिकाना बनाने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने क्यूबा पर अमेरिकी दबाव को और बढ़ाने का संकल्प लिया। साथ ही, उन्होंने अपने दावों को दोहराते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में दुनिया भर में कई संघर्ष थमे हैं और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के प्रभाव को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अमेरिका और उसके विरोधी देशों के बीच बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है।
मैं ईरान को कभी भी न्यूक्लियर वेपन हासिल करने नहीं दूंगा - UNGA में बोले ट्रंप
— RT Hindi (@RT_hindi_) September 22, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला सबसे बड़ा देश, ईरान है। 51 वर्षों से ईरान की कट्टरपंथी सरकार ने खून-खराबा और बड़े पैमाने पर हत्याओं के जरिए राज किया है और पूरे मध्य पूर्व और… pic.twitter.com/iCFagDbvVa
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