चुनाव आयोग (EC) की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया इन दिनों बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों द्वारा बार-बार आपत्ति जताने का खुलासा होने के बाद आयोग ने अपनी सफाई पेश की है।
आयोग का दावा: सर्वसम्मति से हुए फैसले विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया है कि संस्थान के सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की पूरी सहमति थी। आयोग का कहना है कि हालांकि आंतरिक चर्चाओं में कुछ मुद्दों पर असहमति थी, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से ही लिए गए।
10 महीनों में दर्ज हुई 14 आपत्तियां मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मतदाता सूची को दुरुस्त करने के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों के भीतर 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। ये आपत्तियां मुख्य रूप से कुछ राज्यों में नामों को हटाने की प्रक्रिया से जुड़ी थीं। सूत्रों का कहना है कि इन आपत्तियों के बावजूद, SIR के समग्र फैसलों पर आयोग का रुख एक था।
विपक्ष का हमला: बहुमत दरकिनार करने का आरोप राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने आरोप लगाया कि 25 जून 2025 के बाद से आयोग में लिए गए अधिकांश फैसले बहुमत के सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दो आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा फैसले लिए जा रहे हैं।
क्या रद्द होंगे EC के फैसले? कपिल सिब्बल ने मांग की है कि यदि फैसले बहुमत की सहमति के बिना लिए गए हैं, तो उन्हें अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि कानून के तहत चुनाव आयोग के निर्णय बहुमत से लिए जाने चाहिए, न कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की इच्छा पर। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर का प्रयास भी करार दिया।
नियम क्या कहता है? चुनाव आयोग के मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े फैसले पर तीन सदस्यीय पैनल (मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त) की मुहर जरूरी होती है। प्रावधान यह है कि यदि तीन में से दो सदस्य किसी फैसले पर सहमत हैं, तो उसे बहुमत माना जाएगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या फाइलों पर हस्ताक्षर के बावजूद आंतरिक स्तर पर आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच मतभेद इतने गहरे हैं कि वे कानूनी विवाद का रूप ले सकते हैं?
STORY | Election Commissioners flagged issue but poll body unanimous on SIR decisions: Officials
— Press Trust of India (@PTI_News) September 23, 2026
Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi had flagged multiple issues, including deletion of names, in various states during the voter roll cleanup but the poll… pic.twitter.com/jISOISMyYu
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